भारत और पाकिस्तान के बीच कूटनीति तनाव तेज़, दिल्ली में पाकिस्तानी उच्चायोग के बाहर हटाए गए सुरक्षा बैरिकेड्स

भारत सरकार ने एक बड़े कूटनीतिक कदम के तहत नई दिल्ली स्थित पाकिस्तान उच्चायोग के बाहर लगे सभी अवैध अतिक्रमण और सुरक्षा बैरिकेड्स को पूरी तरह से हटा दिया है। यह कार्रवाई 19 अगस्त 2026 को की गई, जिसे पाकिस्तान सरकार द्वारा तीन दिन पहले 16 अगस्त 2026 को इस्लामाबाद स्थित भारतीय उच्चायोग के बाहर से सुरक्षा बैरिकेड्स हटाने के जवाब में एक पारस्परिक कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है। इस घटनाक्रम से दोनों पड़ोसी देशों के बीच चल रहा कूटनीतिक तनाव और अधिक गहरा गया है।
जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के दौरे पर अमेरिकी राजदूत
इसी समय के दौरान, क्षेत्रीय कूटनीति में तब और हलचल मच गई जब भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने जम्मू-कश्मीर और लद्दाख का दौरा किया। अपने इस दौरे के दौरान अमेरिकी राजदूत ने साफ शब्दों में कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का एक अहम और अभिन्न हिस्सा है। इस बयान के बाद पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने तुरंत प्रतिक्रिया दी और इस्लामाबाद में अमेरिकी दूतावास के चार्ज डी अफेयर्स को तलब कर इस बयान पर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया। हाल ही में हुए पहलगाम आतंकी हमले और भारतीय सैन्य अभियान 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद से दोनों देशों के बीच कूटनीतिक मोर्चे पर लगातार गर्मागरम स्थिति बनी हुई है।
ऑपरेशन सिंदूर और आईएस पीआर की प्रतिक्रिया
मई 2025 के दौरान हुए गंभीर सैन्य टकराव से जुड़े 'ऑपरेशन सिंदूर' को लेकर पाकिस्तान की सेना की मीडिया शाखा आईएसपीआर ने भारत के उस दस्तावेजी वीडियो को खारिज कर दिया है जिसमें इस अभियान को सौ प्रतिशत सफल बताया गया था। पाकिस्तानी सेना का दावा है कि उन्होंने 'मरका-ए-हक' संघर्ष के दौरान भारतीय सेना की आक्रामकता को पूरी तरह से नाकाम कर दिया था और उनके आठ सैन्य विमानों को मार गिराया था। हालांकि भारत सरकार ने हमेशा से ही कूटनीतिक नियमों और प्रोटोकॉल को लेकर बहुत सख्त रुख अपनाया है।
पहले भी उठाए गए हैं कड़े कदम
भारतीय अधिकारियों ने पहले ही पाकिस्तानी चार्ज डी अफेयर्स को औपचारिक डिमार्श जारी कर यह साफ निर्देश दिया था कि कोई भी पाकिस्तानी राजनयिक या अधिकारी अपने आधिकारिक दायरे से बाहर जाकर काम न करे और भारत में अपने विशेषाधिकारों का गलत इस्तेमाल न करे। आपको याद दिला दें कि मई 2025 में ही भारत सरकार ने नई दिल्ली स्थित उच्चायोग के एक पाकिस्तानी अधिकारी को उनके राजनयिक पद के खिलाफ गतिविधियों में शामिल होने के कारण 'पर्सना नॉन ग्रेटा' यानी अवांछित व्यक्ति घोषित कर दिया था।