भारत का बड़ा लक्ष्य, साल 2040 तक रत्न और आभूषण के निर्यात को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने की तैयारी।

भारत सरकार ने देश के व्यापार और अर्थव्यवस्था को एक नई दिशा देने के लिए बहुत बड़ा कदम उठाया है। वाणिज्य विभाग और रत्न एवं आभूषण निर्यात संवर्धन परिषद (GJEPC) की तरफ से एक नया रोडमैप सामने आया है। इस योजना के तहत भारत ने साल 2040 तक रत्न और आभूषण (Gems and Jewellery) के निर्यात को बढ़ाकर 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने का पक्का लक्ष्य तय किया है। यह ऐलान बुधवार, 19 अगस्त 2026 को 'चिंतन शिविर' कार्यक्रम के दौरान किया गया था। इस बारे में अधिक जानकारी आप ANI News पर पढ़ सकते हैं।
निर्यात को बढ़ाने के लिए नई रणनीति और लक्ष्य
वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने जानकारी दी है कि इस नए और बड़े लक्ष्य का मुख्य मकसद देश के निर्यात को बहुत ऊपर उठाना है। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान देश से लगभग 28 अरब डॉलर के आभूषणों का निर्यात किया गया था। इस आंकड़े को अब सरकार कई गुना बढ़ाने की तैयारी कर रही है। इस बारे में पूरी रिपोर्ट ANI Business पर उपलब्ध है। सरकार चाहती है कि देश के कारीगरों की मेहनत और उनकी कला को दुनिया भर में एक अलग पहचान मिले।
डिजाइन और आधुनिक तकनीक पर पूरा जोर
इस बड़े लक्ष्य को हासिल करने के लिए सरकार ने नए रास्ते तैयार किए हैं। अब देश में केवल सामान्य सामान बनाने के बजाय आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा। अधिकारियों ने बताया कि आने वाले समय में 3D प्रिंटिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी आधुनिक तकनीकों को अपनाया जाएगा। इसके साथ ही, भारतीय संस्कृति और परंपरा से जुड़े डिज़ाइनों को गहनों में शामिल किया जाएगा ताकि पूरी दुनिया में भारतीय ब्रांड की मजबूत पकड़ बन सके। इस बारे में विस्तृत जानकारी ANI Business Page पर दी गई है।
जीडीपी में बढ़ेगी हिस्सेदारी
विदेश व्यापार महानिदेशक लाव अग्रवाल ने भी इस बात पर जोर दिया कि देश को अब केवल कच्चा माल भेजने के बजाय पूरी तरह तैयार 'क्राफ्टेड इन इंडिया' उत्पादों पर ध्यान देना चाहिए। घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में लोगों का भरोसा बढ़ाने के लिए तकनीक आधारित नेटवर्क बनाए जा रहे हैं। अनुमान लगाया गया है कि साल 2040 तक यह सेक्टर देश की कुल जीडीपी में 1.2 प्रतिशत का योगदान देगा और भारत के कुल मर्चेंडाइज निर्यात में इसकी हिस्सेदारी करीब 14 प्रतिशत हो जाएगी।