संयुक्त राष्ट्र में भारत की खास पहल, जेनेवा पहुंचा पांच मोरों का कुनबा, यूएन ने बताया फोटो ऑफ द वीक

Aanya9 August 20263 min read74 viewsIndia
संयुक्त राष्ट्र में भारत की खास पहल, जेनेवा पहुंचा पांच मोरों का कुनबा, यूएन ने बताया फोटो ऑफ द वीक

संयुक्त राष्ट्र कार्यालय में भारत की ओर से एक बहुत ही सुंदर और अनोखी पहल देखने को मिली है जहाँ भारत ने तोहफे के तौर पर पाँच भारतीय मोर भेजे हैं। जेनेवा स्थित संयुक्त राष्ट्र कार्यालय पहुंचे इन मोरों के कुनबे का वहाँ स्वागत किया गया और यूएन ने इनकी सुंदर तस्वीरों को अपने अधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर शेयर करते हुए इसे फोटो ऑफ द वीक घोषित किया है। भारत की यह खास पहल न केवल दोनों पक्षों के रिश्तों को मजबूत करती है बल्कि भारत की संस्कृति और प्राकृतिक धरोहर को भी वैश्विक मंच पर एक अलग पहचान दिलाती है।

एरियाना पार्क पहुंचे राष्ट्रीय पक्षी

भारत की तरफ से भेंट किए गए ये पाँचों भारतीय मोर रविवार को जेनेवा के प्रसिद्ध एरियाना पार्क में सुरक्षित पहुंच गए हैं। संयुक्त राष्ट्र जेनेवा कार्यालय ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर इन मोरों की तस्वीरें साझा करते हुए जानकारी दी कि भारत के राष्ट्रीय पक्षी से जुड़ा यह उपहार बहुत ही प्रतीकात्मक है। यह तोहफा संयुक्त राष्ट्र परिसर में चली आ रही लगभग एक सदी पुरानी मोर परंपरा को आगे बढ़ाने का काम करता है। पार्क में इन मोरों के आने से वहाँ की खूबसूरती और जैव विविधता में भी काफी बढ़ोतरी होगी।

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विशेष समारोह में सौंपे गए थे मोर

इस पूरे कार्यक्रम के तहत 07 अगस्त को संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि अरिंदम बागची ने एक विशेष समारोह का आयोजन किया था। इसी समारोह के दौरान उन्होंने इन पाँचों मोरों को संयुक्त राष्ट्र कार्यालय, जेनेवा की महानिदेशक तात्याना वलोवाया को आधिकारिक रूप से सौंपा था। इस समूह में कुल चार नीले मोर और एक सफेद मोर शामिल किया गया है। महानिदेशक तात्याना वलोवाया ने भारत सरकार की इस अनूठी पहल की खुले दिल से सराहना की और यूएन परिसर में इनका स्वागत किया।

मोरों के लिए बनाया गया है अस्थायी आवास

संयुक्त राष्ट्र कार्यालय की महानिदेशक ने बताया कि इन नए मेहमानों के लिए परिसर के भीतर फिलहाल एक विशेष अस्थायी आवास तैयार किया गया है। शुरुआती लगभग तीन महीने तक ये सभी मोर एक सुरक्षित और बंद परिसर के अंदर ही रहेंगे ताकि वे नए माहौल के अनुकूल खुद को ढाल सकें। इसके बाद जब ये वयस्क हो जाएंगे तो एरियाना पार्क में पूरी तरह से स्वतंत्र रूप से घूम सकेंगे। भारतीय स्थायी मिशन के अनुसार, यह अनूठी भेंट भारत और संयुक्त राष्ट्र के बीच गहरी साझेदारी तथा अंतरराष्ट्रीय सहयोग के प्रति भारत की मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

एक सदी पुराना है मोरों का इतिहास

एरियाना पार्क में मोरों के रहने का यह इतिहास कोई नया नहीं है बल्कि यह बहुत पुराना है। संयुक्त राष्ट्र कार्यालय जेनेवा का यह पूरा परिसर एक सौ साल से भी अधिक समय से मोरों का घर रहा है। भारत इससे पहले भी जेनेवा स्थित संयुक्त राष्ट्र कार्यालय को मोर भेंट कर चुका है। इतिहास पर नजर डालें तो वर्ष 1981 में भी भारत सरकार ने वहाँ मोरों की एक जोड़ी भेजी थी। इस बार पाँच नए मोरों के आने से इस ऐतिहासिक सिलसिले को एक बार फिर से नया जीवन मिला है और पार्क की रौनक बढ़ गई है।

प्राकृतिक विरासत और विविधता का प्रतीक

भारतीय मिशन ने अपनी बातचीत में बताया कि भारत का राष्ट्रीय पक्षी मोर हमेशा से ही अपनी सुंदरता, गरिमा और दृढ़ता के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है। इस सांस्कृतिक और प्राकृतिक पहल के माध्यम से भारत ने अपनी समृद्ध प्राकृतिक विरासत और जैव विविधता के संरक्षण के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता को दुनिया के सामने रखा है। भारत और संयुक्त राष्ट्र के बीच यह जुड़ाव केवल एक साधारण उपहार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण के साझा संदेश और दोनों संस्थाओं के बीच के दोस्ताना रिश्तों को भी गहराई से रेखांकित करता है।

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