भारत और नेपाल के बीच बॉर्डर सुरक्षा को लेकर देहरादून में शुरू हुई 14वीं बैठक, सीमा विवाद और घुसपैठ पर होगी चर्चा.

Sushma Kumari20 August 20262 min read46 viewsIndia
भारत और नेपाल के बीच बॉर्डर सुरक्षा को लेकर देहरादून में शुरू हुई 14वीं बैठक, सीमा विवाद और घुसपैठ पर होगी चर्चा.

भारत और नेपाल के बीच सीमा प्रबंधन और सुरक्षा को लेकर 14वीं संयुक्त कार्य समूह (Joint Working Group) की बैठक गुरुवार, 20 अगस्त 2026 को देहरादून के होटल ताज में शुरू हो गई। यह दो दिवसीय बैठक दोनों देशों के गृह और विदेश मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच हो रही है, जिसमें नेपाली प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व नेपाल के गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव आनंद काफ्ले (Anand Kafle) कर रहे हैं। इस उच्च स्तरीय बैठक का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच खुली सीमा पर सुरक्षा को और मजबूत करना तथा आपसी सहयोग को बढ़ाना है।

इस दो दिवसीय सत्र के दौरान मुख्य रूप से सीमा पार होने वाले अपराधों, घुसपैठ, तस्करी और अन्य अवैध गतिविधियों को रोकने पर बातचीत हो रही है। बैठक के एजेंडा में ऐतिहासिक नक्शों के विश्लेषण के जरिए सीमा विवादों को सुलझाना, तीसरे देश के नागरिकों की आवाजाही को नियंत्रित करना और ड्रग्स, हथियारों तथा जाली मुद्रा की तस्करी पर लगाम कसना शामिल है। इसके अलावा, दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल पोखरा में हुई 13वीं बैठक के फैसलों के क्रियान्वयन की समीक्षा कर रहे हैं, साथ ही क्षमता निर्माण सहायता और नेपाल के राष्ट्रीय पहचान पत्र को वैध यात्रा दस्तावेज के रूप में मान्यता देने की संभावना पर भी चर्चा कर रहे हैं। इस पूरी बैठक की विस्तृत जानकारी ANI News की रिपोर्ट में दी गई है।

हालिया उच्च स्तरीय बैठकों का दौर

यह बातचीत दोनों देशों के बीच चल रही लगातार उच्च स्तरीय मुलाकातों का ही एक हिस्सा है। इससे पहले भारतीय सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ (General Dhiraj Seth) ने 16 से 19 अगस्त तक नेपाल का दौरा किया था और भारतीय राजदूत नवीन श्रीवास्तव (Naveen Srivastava) ने 10 अगस्त को नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह (Balendra Shah) से मुलाकात की थी। इसके अलावा, सीमा विवादों को हल करने के लिए आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल पर चर्चा करने के वास्ते 14 अगस्त को लखनऊ में भी अधिकारियों की बैठक हुई थी। UNI India की रिपोर्ट के अनुसार, हालांकि मौजूदा बातचीत में तराई-मदेश क्षेत्र में संभावित अशांति सहित क्षेत्रीय सुरक्षा चिंताओं पर भी गौर किया जा रहा है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों को ऐसी घटनाओं और भारत से संचालित होने वाले समूहों के बीच सीधे जुड़ाव का कोई पुख्ता सबूत नहीं मिला है।

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