भारत-नेपाल के बीच पंचेश्वर परियोजना पर बड़ा फैसला, चार साल बाद फिर शुरू होगी पानी को लेकर उच्चस्तरीय बातचीत

Sushma Kumari7 August 20262 min read54 viewsIndia
भारत-नेपाल के बीच पंचेश्वर परियोजना पर बड़ा फैसला, चार साल बाद फिर शुरू होगी पानी को लेकर उच्चस्तरीय बातचीत

भारत और नेपाल के रिश्तों में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ने वाला है। सितंबर के पहले सप्ताह में दोनों देशों के बीच जल संसाधन सहयोग को लेकर एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की जाएगी। यह बैठक चार साल के लंबे अंतराल के बाद हो रही है, जिससे भारत और नेपाल के बीच जल बंटवारे और विकास से जुड़ी लंबित परियोजनाओं के तेजी से आगे बढ़ने की उम्मीद जगी है। इस अहम बैठक में न केवल पंचेश्वर परियोजना, बल्कि महाकाली संधि से जुड़े अन्य मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा होगी।

बैठक में इन अहम मुद्दों पर होगी चर्चा

भारत-नेपाल के बीच होने वाली इस बातचीत में कई महत्वपूर्ण बिंदुओं को एजेंडे में शामिल किया गया है। ऊर्जा मंत्रालय के संयुक्त सचिव सुशील चन्द्र आचार्य ने इस बात की पुष्टि की है कि पंचेश्वर बहुउद्देश्यीय परियोजना इस वार्ता का मुख्य हिस्सा होगी। इसके अलावा, दोनों देश निम्नलिखित विषयों पर मंथन करेंगे:

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  • टनकपुर बैराज से नेपाल सीमा तक प्रस्तावित लिंक नहर।
  • टनकपुर-महेन्द्रनगर लिंक रोड का निर्माण।
  • दोधारा-चांदनी क्षेत्र में सिंचाई के लिए पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करना।
  • सप्तकोशी हाई डैम बहुउद्देश्यीय परियोजना की समीक्षा।
  • सुनकोशी-कमला स्टोरेज-कम-डाइवर्जन योजना पर विचार-विमर्श।

इसके साथ ही, कोशी और गंडक परियोजनाओं के लिए बनी संयुक्त समितियों की प्रगति की भी समीक्षा की जाएगी। जलभराव और बाढ़ प्रबंधन के मामलों पर भी दोनों देश आपसी सहमति बनाने का प्रयास करेंगे।

क्यों खास है यह द्विपक्षीय बातचीत

यह बैठक इसलिए काफी अहम मानी जा रही है क्योंकि पिछले चार वर्षों से जल संसाधनों को लेकर दोनों देशों के बीच कोई औपचारिक उच्चस्तरीय संवाद नहीं हुआ था। जून महीने में नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल की भारत यात्रा के दौरान लंबित मतभेदों को सुलझाने और महाकाली संधि को प्रभावी ढंग से लागू करने पर सहमति बनी थी। उसी दिशा में आगे बढ़ते हुए अब दोनों पक्ष अपने-अपने प्रस्तावित एजेंडे का आदान-प्रदान कर रहे हैं। वर्तमान में अधिकारी इस एजेंडे को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में जुटे हैं। हिन्दुस्थान समाचार के अनुसार, इस बैठक से वर्षों से अटकी पंचेश्वर परियोजना के धरातल पर उतरने का रास्ता साफ हो सकता है। यह परियोजना दोनों देशों के लिए ऊर्जा और सिंचाई के क्षेत्र में गेम चेंजर साबित हो सकती है। दोनों देशों के सरकारी अधिकारी मानते हैं कि आपसी बातचीत ही वह जरिया है जिससे लंबे समय से चल रही तकनीकी और नीतिगत बाधाओं को दूर किया जा सकता है।

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