भारत और ओमान के बीच व्यापार बढ़ाने का बड़ा प्लान, CEPA समझौता लागू होने से दोगुना होगा कारोबार.

भारत और ओमान के बीच व्यापारिक रिश्तों को एक नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए ओमान में भारत के नए राजदूत H.E. Prashant Pise ने एक बेहद महत्वपूर्ण रणनीति का ऐलान किया है। इस नई योजना का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच मौजूदा व्यापार को दोगुना करना है, जो फिलहाल US$11 billion के आसपास है। भारत और ओमान के बीच हुआ कॉम्प्रिहेंशिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट यानी CEPA इसी साल 1 जून 2026 से पूरी तरह से लागू हो चुका है। इस समझौते के जरिए दोनों देशों के व्यापारियों और आम नागरिकों के लिए कारोबार करना और भी ज्यादा आसान हो जाएगा।
ओमान के विदेश मंत्री को सौंपी गई थी आधिकारिक जानकारी
भारत के नए राजदूत Prashant Pise ने ओमान के विदेश मंत्री Sayyid Badr bin Hamad bin Hamood Albusaidi को पिछले महीने 26 जून 2026 को अपने क्रेडेंशियल्स सौंपे थे। इस मुलाकात के दौरान उन्होंने साफ किया कि इस व्यापारिक समझौते को सही तरीके से लागू करना उनकी प्राथमिकता है। इसके साथ ही दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और आपसी संबंधों को मजबूत करने पर भी खास जोर दिया जा रहा है। इस समझौते की नींव 18 दिसंबर 2025 को साइन किए गए दस्तावेजों के साथ रखी गई थी, जिसे बाद में ओमान के रॉयल डिक्री नंबर 30/2026 के तहत 15 फरवरी 2026 को मंजूरी दे दी गई थी।
व्यापारियों को मिल रहा है टैक्स में बड़ा फायदा
इस नए समझौते के तहत भारत से ओमान जाने वाले करीब 99.38% सामानों पर वैल्यू के हिसाब से ड्यूटी फ्री एक्सेस मिल रहा है, जो ओमान की कुल 98.08% टैरिफ लाइनों को कवर करता है। इस पूरी व्यवस्था को तीन अलग-अलग श्रेणियों में बांटा गया है। इसमें कैटेगरी ए के तहत आने वाले सामानों पर 1 जून 2026 से ही कस्टम ड्यूटी पूरी तरह से खत्म कर दी गई है। वहीं कैटेगरी बी के उत्पादों पर अगले पांच सालों के भीतर यानी 1 जून 2030 तक धीरे-धीरे ड्यूटी कम की जाएगी। इसके अलावा कैटेगरी सी में शामिल सामानों पर लगने वाला टैक्स अगले 10 सालों में यानी 1 जून 2035 तक पूरी तरह से समाप्त कर दिया जाएगा।
खाड़ी देशों में भारतीय कारोबारियों के लिए नया रास्ता
भारतीय राजदूत लगातार ओमान के अलग-अलग बिजनेस संगठनों और स्थानीय लोगों से मुलाकात कर रहे हैं। हाल ही में उन्होंने धेफरा क्षेत्र का दौरा किया था ताकि वहां सेवाओं, व्यापार और प्रोफेशनल्स की आवाजाही को बढ़ावा दिया जा सके। ओमान के महावाणिज्य मंत्री Mahboob Issa Al Raisi का कहना है कि अब दोनों देशों का रिश्ता सिर्फ खरीददार और विक्रेता तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि यह एक मजबूत रणनीतिक साझेदारी में बदल चुका है। उनके मुताबिक ओमान भारतीय व्यापारियों के लिए खाड़ी देशों, पूर्वी अफ्रीका और पूरी दुनिया के बाजारों तक पहुंचने का एक बड़ा जरिया बन रहा है। वित्त वर्ष 2025-26 में दोनों देशों के बीच कुल द्विपक्षीय व्यापार US$11.18 billion तक पहुंच चुका है और अधिकारियों को उम्मीद है कि इस नई शुरुआत से दोनों देशों की अर्थव्यवस्था को और ज्यादा मजबूती मिलेगी।