भारत और अमेरिका के बीच सिविल न्यूक्लियर सहयोग पर हुई खास चर्चा, जल्द अमेरिका जाएंगे डीएई सचिव.

अमेरिका में भारत के राजदूत Sergio Gor और परमाणु ऊर्जा विभाग यानी DAE के सचिव Ajit Kumar Mohanty ने हाल ही में एक अहम बैठक की है। इस मीटिंग में दोनों देशों के बीच सिविल न्यूक्लियर यानी नागरिक परमाणु क्षमताओं को आगे बढ़ाने को लेकर विस्तार से बातचीत की गई। अमेरिकी दूतावास की तरफ से दी गई जानकारी के मुताबिक यह बैठक सचिव मोहनती की अमेरिका की तय यात्रा से ठीक पहले हुई है, जिससे इस मुलाकात के मायने और भी ज्यादा खास हो जाते हैं।
शांति एक्ट और प्राइवेट कंपनियों की एंट्री
यह पूरी बातचीत मुख्य रूप से SHANTI Act यानी 'Sustainable Harnessing and Advancement of Nuclear Energy for Transforming India' एक्ट को लागू करने के इर्द-गिर्द घूम रही है। यह कानून भारत में 20 December 2025 को लागू हुआ था, जिसका मुख्य उद्देश्य देश में परमाणु ऊर्जा के उत्पादन के लिए प्राइवेट सेक्टर यानी निजी कंपनियों के लिए रास्ते खोलना है। इसके बाद 17 August 2026 को परमाणु ऊर्जा विभाग ने इस एक्ट के लिए ड्राफ्ट नियम भी जारी कर दिए थे, जिससे कंपनियों के लिए काम करना आसान हो सके।
लाइसेंस और देनदारी के नियम
जारी किए गए नए नियमों के तहत सुविधाओं के निर्माण और संचालन के लिए एक सिंगल कंपोजिट लाइसेंस का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा कंपनियों को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय तकनीकों तक आसान पहुंच भी मिलेगी। इस नए कानून में देनदारी का एक तय ढांचा भी बनाया गया है, जिसके तहत 3,600 MWe से ज्यादा क्षमता वाले रिएक्टरों के लिए ऑपरेटर की देनदारी की सीमा Rs 3,000 crore तय की गई है। इस पूरी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए USISPF यानी US-India Strategic Partnership Forum अमेरिकी परमाणु इंडस्ट्री से मिल रही सलाह और सुझावों को इकट्ठा कर रहा है।
इंडस्ट्री की प्रतिक्रिया और कानूनी पेंच
सभी इंडस्ट्री स्टेकहोल्डर्स को अपने सुझाव और फीडबैक DAE के पास 4 September 2026 तक जमा कराने के निर्देश दिए गए हैं। देश की कई बड़ी निजी कंपनियां जैसे NTPC Ltd, Adani Power और Tata Power पहले से ही न्यूक्लियर प्रोजेक्ट्स के लिए संभावित जमीनों और साइटों की पहचान करने में जुटी हुई हैं। हालांकि इन तमाम सरगर्मियों के बीच शांति एक्ट को अभी कुछ कानूनी अड़चनों का भी सामना करना पड़ रहा है। देश की सबसे बड़ी अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से इस एक्ट की देनदारी से जुड़े प्रावधानों को लेकर जवाब मांगा है, जिसमें यह चुनौती दी गई है कि इससे अदालतों की किसी भी न्यूक्लियर घटना पर सही मुआवजा तय करने की ताकत पर क्या असर पड़ेगा। इस बारे में आप U.S. Embassy in India की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर पूरी जानकारी पढ़ सकते हैं।