नेपाल के पूर्व सैनिकों के लिए भारतीय सेना प्रमुख का बड़ा ऐलान, स्वास्थ्य और पेंशन सुविधाओं पर होगी विशेष नजर.

भारतीय थल सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने नेपाल दौरे के दौरान वहां रह रहे पूर्व भारतीय सैनिकों और उनके परिवारों के कल्याण को लेकर बड़ी घोषणाएं की हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय सेना अपने पूर्व सैनिकों के स्वास्थ्य, पेंशन और अन्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए हरसंभव प्रयास लगातार जारी रखेगी और किसी भी पूर्व सैनिक को खुद को अकेला महसूस नहीं होने देगी।
पोखरा में आयोजित पेंशन शिविर में की गई खास घोषणाएं
नेपाल के पोखरा में बुधवार को आयोजित एक विशेष पेंशन शिविर को संबोधित करते हुए जनरल धीरज सेठ ने कहा कि भारत और नेपाल के रिश्ते सदियों पुराने हैं और ये सिर्फ दो देशों के बीच के संबंध नहीं बल्कि संस्कृति, परंपरा और साझा इतिहास से जुड़े हैं। इस कार्यक्रम में उन्होंने पूर्व सैनिकों की समस्याओं को गंभीरता से सुना और उनके समाधान के लिए कई महत्वपूर्ण बातों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पोखरा स्थित ‘एक्स-सर्विसमेन कंट्रीब्यूटरी हेल्थ स्कीम’ (ECHS) पॉलीक्लिनिक को और अधिक आधुनिक बनाया जाएगा तथा वहां अतिरिक्त स्वास्थ्य उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे ताकि मरीजों को किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
सोनौली से गोरखपुर बस सेवा और नए पॉलीक्लिनिक की सौगात
पूर्व सैनिकों की लंबे समय से चली आ रही मांग पर बात करते हुए सेना प्रमुख ने कहा कि सोनौली से गोरखपुर तक सीधी बस सेवा शुरू किए जाने पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। इस बस सेवा के शुरू हो जाने से नेपाल में रहने वाले पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों को भारत आकर ईसीएचएस और अन्य स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठाने में बहुत आसानी होगी। इसके अलावा, पश्चिम नेपाल के पूर्व सैनिकों की सुविधा के लिए कोहलपुर में एक नया ईसीएचएस पॉलीक्लिनिक भी संचालित किया जा रहा है, जिससे पश्चिमी क्षेत्र के परिवारों को इलाज के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा।
व्यासायिक प्रशिक्षण और कौशल विकास पर जोर
स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ पूर्व सैनिकों के परिवारों के लिए रोजगार और कौशल विकास पर भी पूरा ध्यान दिया जा रहा है। विभिन्न जिला सैनिक बोर्डों के माध्यम से कंप्यूटर प्रशिक्षण, ब्यूटीशियन कोर्स और फैशन डिजाइनिंग जैसे व्यावसायिक कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। सिक्किम स्थित मेधावी स्किल्स यूनिवर्सिटी के साथ हुए समझौते के बाद अब इन सभी प्रशिक्षण कार्यक्रमों के प्रमाणपत्रों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता भी मिल चुकी है, जिससे युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते खुल रहे हैं।
गोरखा सैनिकों के योगदान की सराहना
संबोधन के अंत में सेना प्रमुख ने भारतीय सेना में अपनी सेवाएं दे चुके गोरखा सैनिकों की वीरता, बहादुरी, निष्ठा और बलिदान की खुलकर प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि गोरखा सैनिकों ने देश के लिए हर युद्ध और हर कठिन परिस्थिति में अदम्य साहस का परिचय दिया है। कार्यक्रम का समापन “जय हिंद, जय नेपाल, जय भूपू” के नारों के साथ किया गया, जिससे वहां मौजूद सभी पूर्व सैनिकों में अपने देश के प्रति सम्मान और अपनेपन की भावना साफ झलकी।