भारत में कंज्यूमर फाइनेंसियल कॉन्फिडेंस ने तोड़े सभी रिकॉर्ड, जीएसटी और सस्ते लोन से लोगों की जेब हुई मजबूत।

Praggya Singh sabal20 August 20263 min read59 viewsIndia
भारत में कंज्यूमर फाइनेंसियल कॉन्फिडेंस ने तोड़े सभी रिकॉर्ड, जीएसटी और सस्ते लोन से लोगों की जेब हुई मजबूत।

भारतीय उपभोक्ताओं के वित्तीय आत्मविश्वास में इस साल जबरदस्त उछाल देखने को मिला है और यह स्तर अब तक के सबसे ऊंचे पायदान पर पहुंच गया है। साल 2026 में होम क्रेडिट फाइनेंशियल वेल-बीइंग इंडेक्स बढ़कर 40 अंक पर पहुंच गया है, जो इस सर्वे की शुरुआत यानी साल 2023 के बाद से सबसे ज्यादा है। ANI की रिपोर्ट के मुताबिक, यह आंकड़ा पिछले साल दर्ज किए गए 34 अंक से काफी बेहतर है। इस बेहतरीन सुधार के पीछे मुख्य वजहें जीएसटी में राहत और आसानी से मिलने वाला कर्ज हैं, जिससे आम लोगों को अपने लंबे समय के लक्ष्यों को पूरा करने में काफी मदद मिल रही है।

वित्तीय लक्ष्यों और बचत में आई तेजी

इस सर्वे के आंकड़ों पर नजर डालें तो करीब 85 प्रतिशत लोगों ने यह भरोसा जताया है कि वे अगले पांच सालों में अपने पर्सनल फाइनेंस से जुड़े लक्ष्यों को आसानी से हासिल कर लेंगे। वहीं दूसरी तरफ, लगभग 87 प्रतिशत लोगों को यह उम्मीद है कि आने वाले समय में उनकी कुल वित्तीय स्थिति में और ज्यादा सुधार होगा। जीएसटी में हुए सुधारों की वजह से करीब 50 प्रतिशत लोगों ने माना है कि अब घर का खर्च चलाने में होने वाला तनाव कम हुआ है। इसके अलावा 47 प्रतिशत लोगों का कहना है कि अचानक आने वाले खर्चों को संभालना अब उनके लिए ज्यादा आसान हो गया है। इन सभी राहतों के चलते करीब 63 प्रतिशत उपभोक्ता अपने भविष्य को लेकर ज्यादा सुरक्षित महसूस कर रहे हैं। भारत में अपना खुद का घर खरीदना आज भी लोगों का सबसे बड़ा सपना बना हुआ है, जिसमें 31 प्रतिशत लोग अगले पांच सालों में घर खरीदने की प्लानिंग कर रहे हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि महिलाओं में यह आंकड़ा बढ़कर 40 प्रतिशत हो गया है। बचत और निवेश के मामले में भी साल 2026 में लोगों का रुख काफी सकारात्मक रहा है, जहां 46 प्रतिशत लोगों ने अपनी बचत बढ़ने की बात कही है और 44 प्रतिशत लोगों ने अपने निवेश में बढ़ोतरी दर्ज की है। अगर जनरेशन की बात करें तो बचत करने के मामले में Gen Z सबसे आगे है, जिनका आंकड़ा 58 प्रतिशत है। इसके बाद मिलेनियल्स 53 प्रतिशत के साथ और Gen X 44 प्रतिशत के साथ दूसरे व तीसरे स्थान पर आते हैं। इसके अलावा करीब 82 प्रतिशत लोगों का यह मानना है कि डिजिटल वित्तीय टूल और सस्ता कर्ज उनकी आर्थिक तरक्की में सबसे बड़े मददगार साबित हो रहे हैं। इस बारे में अधिक जानकारी आप ANI News पर देख सकते हैं।

सरकारी नीतियां और आरबीआई के कदम

भारतीय उपभोक्ताओं के आत्मविश्वास में आई इस तेजी के पीछे देश की बड़ी आर्थिक नीतियां भी अहम भूमिका निभा रही हैं। जुलाई 2026 में भारतीय रिजर्व बैंक यानी RBI ने कंज्यूमर कॉन्फिडेंस सर्वे इंडेक्स 88.3 दर्ज किया था और देश के 19 शहरों में एक नया सर्वे भी शुरू किया था। इसके अलावा अगस्त 2026 की बैठक में आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति ने बाजार में मांग को बनाए रखने के लिए रेपो रेट को बिना किसी बदलाव के 5.25 प्रतिशत पर ही बरकरार रखा है। सरकार की तरफ से चलाई जा रही योजनाएं जैसे कि प्रधानमंत्री आवास योजना - शहरी यानी PMAY-U 2.0, जिसे 1 सितंबर 2024 को लॉन्च किया गया था, लोगों को सस्ते लोन और घर दिलाने में लगातार मदद कर रही है। इसके साथ ही मई 2026 की एक रिपोर्ट में देश के क्रेडिट बाजार में मजबूत ग्रोथ देखी गई है, और अगस्त 2026 के आंकड़ों के मुताबिक लोगों की खर्च करने की आदत में बदलाव आया है। लोग अब यात्राओं पर ज्यादा खर्च कर रहे हैं और निवेश के जरिए अपनी संपत्ति भी बढ़ा रहे हैं। इस पूरी रिपोर्ट और आर्थिक सुधारों से जुड़ी विस्तृत जानकारी आप ANI News Topic पर पढ़ सकते हैं।

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