Saudi Arabia News: सज़ा पूरी होने के बाद भी जेल में फंसे भारतीय, 10,000 रियाल का जुर्माना न चुकाने पर नहीं मिली रिहाई.

सऊदी अरब से एक बड़ी खबर सामने आ रही है जहां एक भारतीय नागरिक अपनी जेल की सजा पूरी करने के बावजूद अभी भी सलाखों के पीछे रहने को मजबूर है। रियाद में स्थित भारतीय दूतावास ने इस बात की पुष्टि की है कि भारतीय नागरिक Aziz Khan का जेल का समय पूरा हो चुका है, लेकिन उन पर 10,000 SAR (सऊदी रियाल) का जुर्माना बकाया है। नियम के मुताबिक जब तक इस जुर्माने का भुगतान नहीं किया जाता या सऊदी सरकार की तरफ से इसे माफ नहीं किया जाता, तब तक उनकी रिहाई संभव नहीं हो पा रही है। इस तरह के मामलों में अक्सर प्रवासियों को बहुत परेशानी उठानी पड़ती है जब कागजी कार्रवाई या पैसों की कमी के कारण उन्हें तय समय पर घर लौटने का मौका नहीं मिलता है।
सोशल मीडिया पर परिवार की गुहार के बाद खुला मामला
यह पूरा मामला तब सामने आया जब Aziz Khan के एक रिश्तेदार Rajak Khan ने 10 अगस्त को सोशल मीडिया के माध्यम से भारतीय दूतावास से मदद की गुहार लगाई। उन्होंने अपनी अपील में बताया कि उनके परिवार के सदस्य ने अपनी पूरी सजा काट ली है, फिर भी उन्हें अब तक रिहा क्यों नहीं किया गया है। परिवार का कहना था कि उन्हें इस देरी की कोई भी ठोस जानकारी नहीं मिल पा रही थी और न ही वे समझ पा रहे थे कि अब कौन सी कानूनी प्रक्रिया बाकी रह गई है। पीड़ित परिवार के पास उनकी पहचान से जुड़ी कुछ अहम जानकारियां भी थीं, जिसमें ID No: 2520388402 और Case No: 4670477439 शामिल है। साथ ही यह भी बताया गया कि उन्हें Room No: E38 में रखा गया था। परिवार की इस परेशानी को देखते हुए सोशल मीडिया पर लोगों ने भी अपनी चिंता जताई थी और मदद की मांग की थी।
भारतीय दूतावास की प्रतिक्रिया और अधिकारियों की जांच
परिवार की इस अपील पर तुरंत संज्ञान लेते हुए भारतीय दूतावास ने शुरुआती जवाब में साफ किया कि सजा पूरी होने के बाद भी किसी व्यक्ति की हिरासत में रहने के पीछे मुख्य वजह आम तौर पर बकाया जुर्माना या अन्य वित्तीय देनदारियां होती हैं। दूतावास ने उस समय भरोसा दिलाया था कि वे इस पूरे मामले की स्थानीय सऊदी अधिकारियों के साथ मिलकर जांच करेंगे और पता लगाएंगे कि असल अड़चन कहां आ रही है। इसके बाद दूतावास ने नया अपडेट जारी करते हुए स्पष्ट कर दिया कि 10,000 रियाल का भारी जुर्माना ही उनकी मौजूदा कैद की मुख्य वजह बना हुआ है। खाड़ी देशों में काम करने वाले कई भारतीय अक्सर ऐसे कानूनी और वित्तीय मामलों में फंस जाते हैं, जिससे वहां रहने वाले प्रवासियों और उनके स्वदेश में बैठे परिवारों की चिंता काफी बढ़ जाती है।