Qatar में फंसे भारतीय श्रमिक की घर वापसी, शोषण के शिकार मजदूर को दूतावास ने बचाया.

अंबेडकर नगर के जलालपुर निवासी Mohammed Aamir आखिरकार अपने वतन सुरक्षित लौट आए हैं। कतर में काम करने गए इस श्रमिक को वहां न केवल वेतन कम मिला, बल्कि उसे अमानवीय हालातों में काम करने के लिए मजबूर किया गया। अब Pravasi Bharatiya Sahayata Kendra (PBSK) और स्थानीय स्तर पर चली मुहिम के बाद उनकी घर वापसी संभव हो सकी है।
क्या था पूरा मामला
Mohammed Aamir ने 13 जून 2026 को कतर के लिए उड़ान भरी थी। वहां उन्हें ब्रेड मेकर के तौर पर काम मिला था। मौखिक रूप से उन्हें 1,500 Qatari Riyals देने का वादा किया गया था, लेकिन लिखित अनुबंध में यह राशि 1,200 Riyals थी। इसके बावजूद उन्हें हर महीने मात्र 1,000 Riyals ही भुगतान किए गए, जो कि उनके साथ हुए धोखे को बयां करता है।
काम का भारी दबाव और खराब स्थिति
वेतन में कटौती के साथ ही, Mohammed Aamir को वहां बेहद खराब परिस्थितियों में रखा गया। उन्हें खाने की भारी किल्लत का सामना करना पड़ा। अनुबंध के अनुसार काम के घंटे 8 से 10 तय थे, लेकिन उनसे रोजाना 15 से 16 घंटे तक काम करवाया गया। अपनी इस दयनीय स्थिति से परेशान होकर वे अक्सर भारत में अपने परिवार को फोन कर मदद की गुहार लगाते थे। उनका परिवार आर्थिक तंगी से जूझ रहा था, क्योंकि उन्हें विदेश भेजने के लिए करीब 80,000 रुपये से 1 लाख रुपये तक का खर्च उठाना पड़ा था।
दूतावास की मदद से मिली राहत
Mohammed Aamir की इस मुश्किल घड़ी में Abid Hussain द्वारा शुरू की गई मुहिम और दोहा स्थित भारतीय दूतावास के Pravasi Bharatiya Sahayata Kendra (PBSK) ने सक्रिय भूमिका निभाई। इन प्रयासों के बाद वे सुरक्षित अपने घर पहुँच गए हैं। दूतावास की ओर से दी गई मदद ने इस श्रमिक के जीवन को एक बार फिर सामान्य करने में बड़ी भूमिका निभाई है।