अंतरराष्ट्रीय नेताओं ने इसराइल की वेस्ट बैंक सेटलमेंट योजना की निंदा की, खाड़ी देशों ने जताई गहरी चिंता.

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसराइल के वेस्ट बैंक में बस्तियों के विस्तार की योजनाओं को लेकर विरोध लगातार बढ़ता जा रहा है। इसी कड़ी में 22 अगस्त 2026 को खाड़ी सहयोग परिषद यानी GCC के महासचिव Jasem Mohamed Albudaiwi ने इसराइल की ओर से कब्जे वाले वेस्ट बैंक में चल रहे सेटलमेंट विस्तार की औपचारिक रूप से कड़ी निंदा की है। उनका मुख्य निशाना विवादित E1 प्रोजेक्ट था, जिसे लेकर दुनिया भर के कई बड़े देश और संगठन अपनी आपत्ति दर्ज करा चुके हैं। इस बारे में अधिक जानकारी QNA की रिपोर्ट में दी गई है।
महासचिव Jasem Mohamed Albudaiwi ने साफ शब्दों में कहा कि इन योजनाओं को आगे बढ़ाना अंतरराष्ट्रीय नियमों और वैधता को खुली चुनौती देने के समान है। इससे फलस्तीनी लोगों के अधिकारों को गंभीर खतरा पैदा होता है और साथ ही क्षेत्रीय शांति तथा दो-राज्य समाधान की उम्मीदों को भी बड़ा झटका लगता है। इस संबंध में विस्तृत जानकारी WAM पोर्टल पर भी उपलब्ध कराई गई है।
E1 प्रोजेक्ट और आवास इकाइयों का विवाद
चर्चित E1 प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य येरुसलम को Ma'ale Adumim बस्ती के साथ जोड़ना है। इस योजना के तहत 18 अगस्त 2026 को 1,234 नए घरों यानी आवास इकाइयों के निर्माण के लिए टेंडर खोला गया था। यह पूरा विकास कार्य पहले से मंजूर की जा चुकी 3,401 इकाइयों की एक बड़ी योजना का ही हिस्सा है। इसके लिए अंतिम बोली लगाने की आखिरी तारीख 19 अक्टूबर तय की गई है, जो इसराइल में होने वाले आगामी चुनावों से ठीक पहले यानी 27 अक्टूबर से पहले रखी गई है।
अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों और विभिन्न वैश्विक निकायों ने चेतावनी दी है कि इस प्रोजेक्ट के लागू होने से उत्तरी और दक्षिणी वेस्ट बैंक के बीच का भौगोलिक संपर्क पूरी तरह टूट सकता है। यदि ऐसा होता है, तो भविष्य में एक स्वतंत्र और जुड़े हुए फलस्तीनी देश का निर्माण होना लगभग असंभव हो जाएगा।
वैश्विक स्तर पर बढ़ता विरोध
इस योजना के खिलाफ दुनिया भर में विरोध के सुर तेज हो गए हैं। 22 अगस्त को यूरोपीय आयोग के साथ-साथ ग्रीस, ऑस्ट्रिया, स्पेन, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, स्वीडन और बेल्जियम ने मिलकर इसराइल से इस प्रोजेक्ट को तुरंत वापस लेने की मांग की। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष Ursula von der Leyen ने इस टेंडर प्रक्रिया को पूरी तरह से अस्वीकार्य करार दिया है। ये सभी देश पहले से ही फ्रांस, ब्रिटेन, जर्मनी, इटली, नीदरलैंड, नॉर्वे और कनाडा जैसे देशों के उस समूह के साथ खड़े हैं जो इस विस्तार का लगातार विरोध कर रहा है।
इसके अलावा, 21 अगस्त को तुर्किये, यूएई, इंडोनेशिया, कतर, मिस्र, पाकिस्तान, सऊदी अरब और जॉर्डन के विदेश मंत्रियों ने भी एक साझा बयान जारी किया। उन्होंने क्षेत्र की जनसांख्यिकी यानी आबादी के स्वरूप को बदलने के किसी भी प्रयास पर गहरी चिंता जताई और सभी प्रकार की बस्ती गतिविधियों को तुरंत रोकने की मांग की। मुस्लिम वर्ल्ड लीग और वेस्ट बैंक स्थित फलस्तीनी सरकार ने भी इस मामले में कड़ी चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि इस तरह के कदम पूरे क्षेत्र को एक ऐसी स्थिति में धकेल रहे हैं जिस पर काबू पाना बेहद मुश्किल हो जाएगा।