InvestorAI रिपोर्ट: भारत के शेयर बाजार में जबरदस्त मजबूती, कच्चे तेल के दाम बढ़ने के बाद भी नहीं घबराए निवेशक

भारत के घरेलू शेयर बाजार ने मौजूदा वैश्विक तनाव और भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बीच गजब की ताकत दिखाई है। InvestorAi की रिपोर्ट के मुताबिक, बड़े निवेशकों की तरफ से लगातार पैसा लगाने के कारण बाजार में स्थिरता बनी हुई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड यानी कच्चे तेल के दाम लगभग $90 के करीब पहुंच चुके हैं और अमेरिका तथा ईरान के बीच रिश्तों में भी तनाव बना हुआ है, लेकिन इसके बावजूद देश के भीतर शेयर बाजार में कोई घबराहट देखने को नहीं मिल रही है। बाजार के जानकारों का मानना है कि सरकारी खर्च, टेलीकॉम सेक्टर में सुधार और सरकारी बैंकों द्वारा दिए जा रहे कर्ज के दम पर भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत स्थिति में है।
बाजार में क्यों बनी हुई है मजबूती और क्या है कारण
रिपोर्ट में बताया गया है कि सरकार द्वारा बुनियादी ढांचे यानी इंफ्रास्ट्रक्चर पर लगातार पैसा खर्च किया जा रहा है, जिससे कई सेक्टरों को सीधा फायदा मिल रहा है। इसके अलावा टेलीकॉम कंपनियों के एवरेज रेवेन्यू प्रति यूजर यानी ARPU में भी सुधार देखा जा रहा है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों यानी पीएसयू बैंकों द्वारा कर्ज देने की रफ्तार भी अच्छी बनी हुई है। इन सभी वजहों से इन सेक्टरों की कमाई पर कच्चे तेल की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव का ज्यादा असर नहीं पड़ रहा है। देश का वोलैटिलिटी इंडेक्स यानी India VIX इस समय 11.35 पर है, जो यह बताता है कि दुनिया भर में चल रही उथल-पुथल का भारत के घरेलू बाजार पर कोई बुरा असर नहीं पड़ रहा है और निवेशक सुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
किन शेयरों पर है एक्सपर्ट्स की नजर और क्या हैं चुनिंदा नाम
इस रिपोर्ट में कुछ चुनिंदा कंपनियों के शेयरों को निवेशकों के लिए बेहतर बताया गया है। इन शेयरों में Ashok Leyland, Union Bank of India, Bharti Airtel, Larsen & Toubro और Titan Company के नाम शामिल हैं। इन कंपनियों को चुनने के पीछे मुख्य वजहें सड़कों और अन्य निर्माण कार्यों पर खर्च, कर्ज बांटने में तेजी, मोबाइल रिचार्ज प्लान में बदलाव और शहरों में लोगों द्वारा सामान खरीदने की क्षमता में सुधार होना है। इन सभी कंपनियों के कामकाज को देखकर एक्सपर्ट्स मान रहे हैं कि आने वाले दिनों में इनकी स्थिति और बेहतर हो सकती है।
किन बातों से आ सकती है बाजार में दिक्कत
विश्लेषकों ने चेतावनी भी दी है कि अगर कच्चे तेल की कीमत $90 के पार निकल जाती है और साथ ही भारतीय रुपया कमजोर होकर 96 के पार चला जाता है, तो स्थिति बदल सकती है। इस तरह की परिस्थिति बनने पर कंपनियों के मुनाफे पर असर पड़ सकता है और विदेशी संस्थागत निवेशक यानी एफआईआई भारतीय बाजार से अपना पैसा निकाल सकते हैं, जिससे दोबारा समीक्षा करनी पड़ सकती है। हालांकि वर्तमान समय में घरेलू बाजार पूरी तरह से स्थिर नजर आ रहा है और निवेशक लगातार खरीदारी कर रहे हैं।