ईरान ने इसराइल पर लगाए गंभीर आरोप, कहा अमेरिका के साथ शांति समझौते को कर रहा है फेल

मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर से बहुत ज्यादा बढ़ गया है और इस बीच ईरान ने इसराइल पर बड़ा आरोप लगाया है। Iranian Foreign Minister Abbas Araghchi ने कहा है कि इसराइल लगातार अमेरिका के साथ होने वाले शांति समझौतों को बिगाड़ने की कोशिश कर रहा है। सरकारी समाचार एजेंसी IRNA के मुताबिक, अरागची ने बताया कि 'साइंटिस्ट रेजिम' यानी इसराइल हमेशा से शांति समझौते के रास्ते में सबसे बड़ा रोड़ा रहा है और वह इस डील को फेल करने की फिराक में है। आपको बता दें कि 17 जून को इस्लामाबाद में एक समझौता हुआ था जिसके तहत 60 दिन की समय सीमा तय की गई थी और यह मियाद 17 August 2026 को खत्म हो गई है। इसके बाद से हालात और भी ज्यादा तनावपूर्ण हो गए हैं।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ा तनाव और अमेरिकी धमकी
बातचीत के पूरी तरह से फेल होने के बाद ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने Reuters को जानकारी दी है कि अब ईरान ने पूरी तरह से आक्रामक सैन्य रुख अपना लिया है। दूसरी तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने साफ कह दिया है कि इस अस्थायी संघर्षविराम को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। ट्रंप ने ओमान को भी धमकी दी है कि अगर उसने अमरीकी जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य यानी Strait of Hormuz खोलने से रोकने की कोशिश की, तो ओमान पर बमबारी की जा सकती है। ट्रंप इस रास्ते को अमेरिकी क्षेत्र घोषित करने की बात कर रहे थे। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए ईरानी मंत्री अरागची ने कहा कि दुनिया के जहाजों के लिए यह रास्ता खुला है, लेकिन अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए इसे अपनी सुरक्षा के लिहाज से प्रभावी रूप से बंद कर दिया गया है।
तुर्की और कतर की मध्यस्थता पर ईरान का रुख
ईरान का यह भी कहना है कि उसने खुद जानबूझकर संघर्ष को खींचा ताकि शांति समझौता उसकी अपनी शर्तों पर हो सके। इस बीच तुर्की के विदेश मंत्री Hakan Fidan ने अरागची से मुलाकात की और होर्मुज जलडमरूमध्य तथा शांति समझौते को बचाने को लेकर चर्चा की। हालांकि ईरान का यह साफ कहना है कि कतर और पाकिस्तान जैसे देशों की तरफ से जो बातचीत चल रही है, उसे अमेरिका के साथ औपचारिक बातचीत की शुरुआत नहीं माना जाना चाहिए। यह पूरा कूटनीतिक गतिरोध तब शुरू हुआ जब 17 August को यरूशलेम में अमेरिकी वार्ताकार Jared Kushner और इसराइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu के बीच गाजा शांति प्रस्ताव को लेकर एक अहम बैठक हुई थी जो असफल रही। इसके अलावा ईरान के उप विदेश मंत्री Kazem Gharibabadi ने भी एक बार फिर दोहराया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह से ईरान का संप्रभु क्षेत्र है और वहां सिर्फ ईरान के आदेश ही चलेंगे।