अमेरिका से बातचीत विफल होने पर ईरान ने दी चेतावनी, होर्मुज जलडमरूमध्य में अपनाएगा आक्रामक रुख

अमेरिका के साथ स्थायी शांति समझौते को लेकर चल रही बातचीत में लगातार गतिरोध बना हुआ है। इस स्थिति के बीच ईरान ने अपनी रक्षात्मक नीति को पूरी तरह से बदलने की बड़ी चेतावनी दे दी है। एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने मीडिया से बातचीत करते हुए साफ कर दिया है कि यदि कूटनीतिक प्रयास पूरी तरह से विफल होते हैं, तो ईरान रणनीतिक होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी को तोड़ने के लिए सीधे सैन्य कार्रवाई का रास्ता अपना सकता है। इस बड़े घटनाक्रम से खाड़ी देशों और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल तेज हो गई है।
तनाव बढ़ने पर होगी सटीक सैन्य कार्रवाई
ईरान के वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, देश मौजूदा तनावपूर्ण हालात से निपटने के लिए पूरी तरह से तैयार है। यदि जरूरत पड़ी तो समय पर और बेहद सटीक सैन्य हमला किया जाएगा। आपको बता दें कि होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया भर की तेल आपूर्ति का एक बहुत बड़ा हिस्सा गुजरता है। ऐसे में इस अहम समुद्री मार्ग पर तनाव बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर बहुत गंभीर असर पड़ सकता है, जिससे ईंधन के दाम और वैश्विक अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
जून में हुआ था समझौता ज्ञापन
इस पूरे विवाद की शुरुआत इसी साल जून महीने में हुई थी, जब दोनों देशों के बीच एक समझौता ज्ञापन पर सहमति बनी थी। इस समझौते के तहत अगले 60 दिनों के भीतर युद्ध को पूरी तरह समाप्त करने और तमाम व्यापक मुद्दों पर आपसी समझौता करने का लक्ष्य रखा गया था। लेकिन होर्मुज जलडमरूमध्य के नियंत्रण को लेकर दोनों देशों के बीच मतभेद लगातार बढ़ते चले गए और यह अहम समझौता बीच में ही पटरी से उतर गया।
नियंत्रण को लेकर आमने-सामने तेहरान और वाशिंगटन
तेहरान सरकार का यह दावा है कि उस समझौते के एक खास प्रावधान के तहत उसे इस जलडमरूमध्य के प्रबंधन का पूरा अधिकार मिलता है। दूसरी तरफ, अमेरिका ने इस पूरी व्याख्या को सिरे से खारिज कर दिया है। ईरान ने अपनी बात रखते हुए साफ मांग की है कि अगर आगे की कोई भी बातचीत करनी है, तो अमेरिका को पहले समझौते की सभी शर्तों को जमीन पर लागू करना होगा।
डोनाल्ड ट्रंप का कड़ा रुख
इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर अपना बहुत सख्त रुख एक बार फिर दोहराया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि उनका मुख्य लक्ष्य केवल यह सुनिश्चित करना है कि ईरान किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार हासिल न कर सके। इन दोनों देशों के बीच लगातार बढ़ते तनाव की वजह से पूरे क्षेत्र में एक बार फिर से संघर्ष छिड़ने और तेल की सप्लाई बाधित होने को लेकर गहरी चिंताएं पैदा हो गई हैं। इस पूरी खबर की विस्तृत जानकारी 17 अगस्त को दुबई से हिन्दुस्थान समाचार के माध्यम से आकाश कुमार राय ने साझा की है।