ईरान के एयर फोर्स कमांडर ने दी कड़ी चेतावनी, कहा- देश की रक्षा के लिए जान देने को तैयार हैं हमारे जवान

ईरान के सैन्य नेतृत्व ने क्षेत्रीय तनाव के बीच एक बार फिर अपनी ताकत का प्रदर्शन करते हुए बड़े ऐलान किए हैं। 6 अगस्त 2026 को ईरान के एयर फोर्स चीफ कमांडर, ब्रिगेडियर जनरल पायलट बहमन बेह्मार्ड ने साफ तौर पर कहा कि उनकी वायु सेना देश की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है। IRNA News Agency के अनुसार, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ईरान की सेना दुश्मन की किसी भी आक्रामकता का पूरी मजबूती से जवाब देने के लिए पूरी तरह तैनात है।
क्षेत्रीय तनाव और बढ़ते विवाद
ईरान के विदेश मंत्रालय ने 2 से 3 अगस्त के बीच एक बयान जारी कर देश की सशस्त्र सेनाओं की जमकर तारीफ की। मंत्रालय ने अमेरिका पर आरोप लगाया कि उसने 18 जून को हुए सीजफायर यानी युद्धविराम समझौते का उल्लंघन किया है। ईरान का कहना है कि अमेरिका ने अपनी नौसेना के जरिए नाकाबंदी कर रखी है, सैन्य हमले किए जा रहे हैं और देश पर आर्थिक दबाव बनाया जा रहा है। इस माहौल में ईरान ने साफ किया है कि जब तक दुश्मन की ओर से आक्रामकता बंद नहीं होती, तब तक उनका प्रतिरोध जारी रहेगा।
राष्ट्रपति पेज़ेशकियन और परमाणु मामले पर अपडेट
ईरान के अंदरूनी हालात भी फिलहाल चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। 6 अगस्त 2026 को राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने जानकारी दी कि सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के साथ संपर्क साधना अभी बहुत मुश्किल हो गया है। ऐसा तब हुआ जब खामेनेई अमेरिका और इसराइल के हमलों में घायल हो गए थे और उसके बाद से ही वे सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए हैं। साथ ही, IRGC कमांडर अहमद वाहिदी ने परमाणु क्षमताओं को लेकर कड़ा रुख अपनाया है, जिसके बाद विशेषज्ञों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को आगाह किया है कि वे ईरान की परमाणु गतिविधियों को लेकर चल रही कूटनीतिक बातचीत को हल्के में न लें।
होरमुज़ जलडमरूमध्य को खोलने पर बातचीत
इतने तनाव के बावजूद, खबर है कि ईरान और ओमान के बीच होरमुज़ जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने को लेकर बातचीत आखिरी दौर में पहुंच गई है। ईरान ने अपनी शर्त दोहराई है कि जलडमरूमध्य का रास्ता तभी खुलेगा जब अमेरिका अपनी नौसेना की नाकाबंदी हटा लेगा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस स्थिति पर टिप्पणी करते हुए संकेत दिया है कि दोनों पक्षों के बीच सहमति कल या अगले दिन तक बन सकती है। यह घटनाक्रम न केवल मध्य पूर्व के लिए बल्कि दुनिया भर की सप्लाई चेन के लिए काफी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इस समुद्री रास्ते पर तेल की आवाजाही निर्भर करती है।