इरान ने इराक के एरबिल में कुर्द ठिकानों पर बरसाए मिसाइल और ड्रोन, मचा हड़कंप.

मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर से काफी ज्यादा बढ़ गया है और इस बार मामला पड़ोसी देशों की सीमा के अंदर तक पहुंच चुका है। बुधवार के दिन इरान ने पड़ोसी देश इराक के एरबिल शहर में स्थित कुर्द ठिकानों पर ताबड़तोड़ मिसाइलें और ड्रोन दागे हैं। इस बड़े हमले का मुख्य निशाना ईरान विरोधी कोमाला पार्टी और कुर्दिस्तान डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ ईरान यानी केडीपीआई के लड़ाके रहे हैं। ईरान सरकार इन संगठनों को अपना कट्टर दुश्मन मानती है और लंबे समय से इनके खिलाफ सैन्य कार्रवाई करती आ रही है। ईरानी सरकार के लगातार बढ़ते दबाव और सैन्य हमलों की वजह से ही इस संगठन के लोगों को अपने पुराने और मुख्य ठिकानों को छोड़कर ईरान से बाहर दूसरी जगहों पर रहना पड़ रहा है।
अलग-अलग इलाकों में गिरे अज्ञात ड्रोन
इराक की समाचार एजेंसी शफाक, कुर्द समाचार प्लेटफॉर्म रुदाव और अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थान अल जजीरा की रिपोर्ट से यह जानकारी सामने आई है कि इराक के कुर्दिस्तान क्षेत्र की राजधानी एरबिल के उत्तर में अलग-अलग जगहों पर कुल चार अज्ञात ड्रोन क्रैश होकर नीचे गिर गए। गनीमत यह रही कि इन ड्रोन हमलों और क्रैश होने की घटना में किसी भी आम नागरिक के हताहत होने की कोई सूचना अभी तक सामने नहीं आई है। इन गिराए गए ड्रोनों में से एक ड्रोन का मलबा सोरान जिले के बिल्कुल बीचों-बीच एक साधारण आम नागरिक के घर के ऊपर आकर गिरा, जिससे वहां रहने वाले लोगों में काफी ज्यादा डर का माहौल बन गया। इसके अलावा दो अन्य ड्रोन खलीफान जिले के एक गांव के पास नीचे आ गिरे और चौथा ड्रोन हरिर उप जिले की एक पहाड़ी पर जाकर गिरा, जिससे वहां की सूखी झाड़ियों में भयानक आग लग गई।
एक दिन पहले भी हुआ था हमला
कोमाला पार्टी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी अमजद हुसैन ने इस मामले पर जानकारी देते हुए बताया कि इस ताजा घटना से ठीक एक दिन पहले यानी मंगलवार को भी ईरान ने अलामा घाटी इलाके में उनके समूह के मुख्य मुख्यालय को निशाना बनाकर हमला किया था। उस हमले में उनके समूह के दो सदस्य मामूली रूप से घायल हो गए थे और पार्टी के परिसर को भी काफी नुकसान पहुंचा था। इस पूरे घटनाक्रम के बाद इराक के अर्ध स्वायत्त कुर्दिस्तान क्षेत्र के प्रधानमंत्री मसरूर बरजानी ने बयान दिया है कि यह सारे हमले या तो सीधे तौर पर ईरान की तरफ से किए गए हैं या फिर इराक की सीमा के अंदर ही छिपे कुछ मिलिशिया गुटों ने अंजाम दिए हैं। इस तरह की घटनाओं से पूरे इलाके की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवालिया निशान लग गया है और आम लोग डरे हुए हैं।