Gulf Tension: UAE के टैंकर पर ईरान का हमला, कुवैत के पोर्ट्स को भी बनाया निशाना, बढ़ा क्षेत्रीय तनाव.

खाड़ी के देशों में आज 8 अगस्त 2026 को भारी तनाव देखा गया है। ईरान ने UAE के ADNOC टैंकर पर होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में हमला किया है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, इस हमले के बाद तेहरान ने खुली चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका ने उनके क्षेत्र पर कोई कार्रवाई की, तो वे UAE, कुवैत और कतर के तेल भंडारों को मिसाइलों से निशाना बनाएंगे।
UAE और कुवैत में हमलों का असर
UAE ने इस हमले को समुद्री डकैती और संयुक्त राष्ट्र के नियमों का उल्लंघन बताया है। हालांकि इस हमले में कोई हताहत नहीं हुआ, लेकिन ADNOC ने जानकारी दी है कि उनके अब तक 15 जहाज इस संघर्ष में निशाना बन चुके हैं, जिसमें एक व्यक्ति की जान भी गई है। आज UAE के एयर डिफेंस सिस्टम ने बहादुरी दिखाते हुए 6 ईरानी बैलिस्टिक मिसाइल और 9 ड्रोन को हवा में ही मार गिराया, जिससे बड़ा नुकसान टल गया।
तनाव केवल UAE तक सीमित नहीं रहा। कुवैत के शुवैख पोर्ट और मुबारक अल-कबीर पोर्ट पर भी ड्रोन्स और क्रूज मिसाइलों से हमला हुआ। इससे वहां काफी नुकसान हुआ है, लेकिन राहत की बात यह है कि किसी की जान नहीं गई। सऊदी अरब की सुरक्षा टीम ने भी अपनी पूर्वी सीमा पर 4 ड्रोन को इंटरसेप्ट कर नष्ट कर दिया।
राजनयिक कोशिशें और सुरक्षा की स्थिति
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने सऊदी अरब, तुर्की, कतर और पाकिस्तान के अधिकारियों से बात की है। उन्होंने कहा है कि ईरान कूटनीति के जरिए शांति चाहता है, लेकिन अगर उन पर हमला हुआ तो वे Gulf देशों में मौजूद अमेरिकी संपत्तियों और ऊर्जा ठिकानों पर करारा जवाब देंगे। GCC के महासचिव जसीम अल-बुदाईवी ने चिंता जताई है कि बातचीत में खाड़ी देशों को शामिल करना जरूरी है, ताकि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपना दबदबा न बना सके।
उधर, अमेरिका के जनरल डैन कीन ने भी सलाह दी है कि हवाई हमलों को बढ़ाना सही नहीं है और कूटनीतिक रास्ते से ही इस समस्या का समाधान निकालना चाहिए। बता दें कि 1 अगस्त 2026 को भी ईरान ने कतर, कुवैत और जॉर्डन में सुविधाएं निशाना बनाई थीं। वहीं, सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान के बीच हुई हालिया रक्षा संधि के तहत, अब एक देश पर हमला होने पर उसे तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। खाड़ी में रह रहे प्रवासियों और कामगारों के लिए यह स्थिति चिंताजनक बनी हुई है, क्योंकि इससे ऊर्जा और आर्थिक क्षेत्र पर सीधा असर पड़ सकता है।