Strait of Hormuz विवाद: ओमान के साथ डील में देरी के लिए ईरान ने अमेरिका को ठहराया जिम्मेदार

होरमुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर चल रही बातचीत के बीच तनाव फिर बढ़ गया है। बुधवार, 5 अगस्त 2026 को ईरान ने स्पष्ट किया है कि ओमान के साथ होने वाले समझौते में देरी के पीछे अमेरिका का दखल और उनके सैन्य खतरे मुख्य वजह हैं। ईरान का कहना है कि जब तक अमेरिका की ओर से धमकियां जारी रहेंगी, तब तक किसी भी तरह के समझौते पर आगे बढ़ना मुमकिन नहीं होगा, क्योंकि ईरान दबाव में झुकने को तैयार नहीं है।
ईरान का रुख और ओमान से बातचीत
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmaeil Baghaei ने जानकारी दी है कि ओमान के साथ उनकी बातचीत लगातार चल रही है। इस चर्चा का मुख्य उद्देश्य समुद्री यातायात को सुरक्षित बनाना है, ताकि जहाजों के आने-जाने के लिए सुरक्षित रास्ते तय किए जा सकें। प्रवक्ता ने जोर देकर कहा कि इस पूरी प्रक्रिया में कोई भी तीसरा पक्ष शामिल नहीं है। उन्होंने साफ तौर पर इनकार किया कि अमेरिका के साथ इस मुद्दे पर उनकी कोई भी बातचीत हो रही है। ईरान का यह भी कहना है कि जब तक ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी बनी रहेगी, तब तक होरमुज की स्थिति में कोई बदलाव नहीं आएगा।
अमेरिका और ईरान के बीच खींचतान
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने 4 अगस्त को दावा किया था कि होरमुज मुद्दे पर पूरे दिन बातचीत हुई है। हालांकि, उन्होंने साथ ही ईरान को गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी भी दी थी। दूसरी तरफ, अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने माना है कि बातचीत में थोड़ी प्रगति हुई है और उनकी प्राथमिकता होरमुज को खोलना है, लेकिन उन्होंने यह भी जोड़ा कि किसी भी ऐसे सौदे को स्वीकार नहीं किया जाएगा जिसमें ईरान का होरमुज पर पूर्ण नियंत्रण हो।
अमेरिकी खजाना सचिव Scott Bessent का मानना है कि बिना किसी टोल या शुल्क के आने-जाने की आजादी का समझौता जल्द हो सकता है। वहीं, CENTCOM ने भी 4 अगस्त को स्पष्ट किया कि होरमुज का दक्षिणी रास्ता सभी व्यावसायिक जहाजों के लिए खुला है और उन्होंने ईरान पर अनुचित आक्रामकता का आरोप लगाया है।
समझौते की रूपरेखा
मिली जानकारी के अनुसार, ओमान के साथ प्रस्तावित समझौते में ईरान यह चाहता है कि उसे होरमुज से गुजरने वाले जहाजों पर नियंत्रण का अधिक अधिकार मिले। ईरान इनबाउंड (आने वाले) यातायात पर पूरी तरह नियंत्रण चाहता है और आउटबाउंड (बाहर जाने वाले) जहाजों की निगरानी करने का अधिकार भी अपने पास रखना चाहता है। हालांकि, अमेरिका का कहना है कि अगर कोई अस्थायी रास्ता बनाया भी जाता है, तो उसमें ईरानी मंजूरी या शुल्क की कोई जगह नहीं होगी। यह पूरा मामला अंतरराष्ट्रीय व्यापार और समुद्री सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील बना हुआ है, जिसका सीधा असर खाड़ी देशों के बीच होने वाले समुद्री व्यापार पर पड़ सकता है।