Iran Qeshm Island Oil Spill: ईरान ने अमरीका और इसराइल पर लगाया तेल प्रदूषण फैलाने का आरोप, ओमान के साथ नई शिपिंग व्यवस्था की तैयारी.

ईरान के उप विदेश मंत्री Kazem Gharibabadi ने हाल ही में अमरीका और इसराइल की सैन्य ताकतों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि फारस की खाड़ी के पास स्थित Qeshm Island के तटों पर जो तेल का प्रदूषण फैला है, उसके पीछे इन्हीं देशों की सैन्य कार्रवाई जिम्मेदार है। इस गंभीर पर्यावरणीय घटना की वजह से कुल 32,000 square meters का तटीय इलाका और करीब 90,000 square meters का आसपास का समुद्री पानी बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इस बड़ी घटना के बाद ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य यानी Strait of Hormuz के लिए एक नए प्रबंधन तंत्र की मांग को एक बार फिर से जोर-शोर से उठाया है ताकि भविष्य में ऐसी आपदाओं से सख्ती से निपटा जा सके।
पर्यावरणीय नुकसान और सफाई अभियान
ईरान की पर्यावरण संरक्षण संस्था की प्रमुख Sheena Ansari और अन्य अधिकारियों ने सीधे तौर पर विदेशी सैन्य आक्रामकता को इस पारिस्थितिक नुकसान का मुख्य कारण बताया है। हालांकि, दूसरी तरफ स्वतंत्र मॉनिटर करने वाली संस्था TankerTrackers.com का कुछ और ही कहना है। उनके अनुसार यह तेल का रिसाव किसी सैन्य हमले की वजह से नहीं, बल्कि August 3 को माइनियन पायनियर यानी Minoan Pioneer नाम के एक बल्क कैरियर जहाज पर हुए हादसे या हमले की वजह से शुरू हुआ था। इस मामले को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं और असली वजह को लेकर बहस लगातार जारी है।
इस बीच, होरमोज़गान प्रांत की पर्यावरण संरक्षण संस्था के नेतृत्व में युद्धस्तर पर सफाई अभियान चलाया गया। अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक, कशम और सूजा यानी Suza इलाके के पास फैले प्रदूषित तेल को साफ करने का काम अपने अंतिम चरण में पहुंच गया था और August 12 तक ज्यादातर कचरे को हटा लिया गया था। समुद्र में फैले इस काले तेल की वजह से वहां की समुद्री मछलियों और जीवों पर भी काफी बुरा असर पड़ा था, जिसे बचाने के लिए स्थानीय प्रशासन ने दिन-रात मेहनत करके स्थिति को काफी हद तक नियंत्रित कर लिया है।
ओमान के साथ नई शिपिंग व्यवस्था और राजनीतिक तनाव
सफाई अभियान के साथ-साथ तेहरान सरकार कतर और ओमान जैसे पड़ोसी देशों के साथ मिलकर कूटनीतिक स्तर पर भी बड़े कदम उठा रही है। वर्तमान स्थिति को देखते हुए तेहरान अब ओमान के साथ मिलकर एक नई शिपिंग एडमिनिस्ट्रेशन फ्रेमवर्क को औपचारिक रूप देने की कोशिश कर रहा है। इस योजना के तहत दोनों देश मिलकर समुद्री ट्रैफिक मैनेजमेंट की जिम्मेदारियों को आपस में बांटेंगे। इस नई व्यवस्था का मुख्य मकसद फारस की खाड़ी से गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही को बेहतर तरीके से ट्रैक करना और किसी भी संभावित खतरे को समय रहते रोकना है।
लेकिन यह पहल भू-राजनीतिक मोर्चे पर एक बड़ा विवाद भी बनती जा रही है। ईरान की इस योजना में एक प्रस्ताव यह भी शामिल है कि वहां से गुजरने वाले कार्गो जहाजों पर ट्रांजिट फीस यानी पारगमन शुल्क लगाया जाए। अमरीका ने ईरान के इस प्रस्ताव को पूरी तरह से खारिज कर दिया है और इसे अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों के नियमों के खिलाफ बताया है। ईरानी अधिकारियों का तर्क है कि इस तरह के कड़े उपाय क्षेत्र की सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए बेहद जरूरी हैं, भले ही इसके लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ उनका मतभेद क्यों न बढ़ रहा हो। इस रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण जलमार्ग पर नियंत्रण को लेकर चल रही यह खींचतान आने वाले दिनों में और अधिक तूल पकड़ सकती है।