Iran Central Bank: ईरान के सेंट्रल बैंक ने किया साफ़, अमरीका के साथ हुए जून समझौते के बाद एक भी पैसा नहीं हुआ रिलीज़।

Nura Basta19 August 20263 min read58 viewsWorld
Iran Central Bank: ईरान के सेंट्रल बैंक ने किया साफ़, अमरीका के साथ हुए जून समझौते के बाद एक भी पैसा नहीं हुआ रिलीज़।

अमरीका और ईरान के बीच चल रहे तनाव के बीच एक बड़ी और अहम खबर सामने आ रही है। 19 अगस्त 2026 को ईरान के सेंट्रल बैंक के गवर्नर अब्दोलनासर हेम्मती ने आधिकारिक रूप से यह बात कन्फर्म कर दी है कि जून महीने में अमरीका के साथ जो समझौता हुआ था, उसके तहत ईरान का एक भी रुका हुआ पैसा यानी फ्रोजन फंड वापस नहीं मिला है। इस समझौते के तहत कुछ बैकिंग और आर्थिक पाबंदियों को अस्थायी तौर पर हटाया गया था, लेकिन अब तस्वीर पूरी तरह से बदल चुकी है।

अमरीका और ईरान के बीच बातचीत पूरी तरह से बंद

दोनों देशों के बीच हालात एक बार फिर से बेहद खराब हो गए हैं। अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 19 अगस्त को साफ शब्दों में ऐलान कर दिया है कि ईरान के साथ अब बातचीत पूरी तरह से खत्म यानी 'डेड' हो चुकी है। अमरीका का कहना है कि ईरान ने समझौते की शर्तों का ठीक से पालन नहीं किया, जिसकी वजह से अमरीका ने एक बार फिर से बहुत कड़ी पाबंदियां यानी ड्रैकोनियन सैंक्शन दोबारा लागू कर दी हैं। इस बड़े उलटफेर के बाद से पूरी दुनिया के बाजारों और आर्थिक मामलों में हलचल मच गई है।

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आपकी जानकारी के लिए बता दें कि जून में जो समझौता हुआ था, उसके पीछे स्विट्जरलैंड में लंबी बातचीत चली थी, जिसमें पाकिस्तान और कतर ने मध्यस्थता की भूमिका निभाई थी। उस समय ईरानी अधिकारियों ने यह दावा किया था कि इस डील के तहत उनके 12 अरब डॉलर के फंसे हुए资产 यानी एसेट्स को जारी किया जाएगा। हालांकि, अमरीकी अधिकारियों ने कभी भी इस बात को पूरी तरह नहीं माना था कि यह पैसा बिना किसी शर्त के ईरान को मिलेगा। इससे पहले भी साल 2023 में कतर में रखे 6 अरब डॉलर को मानवीय मदद और कैदियों की अदला-बदली के लिए निकाला गया था, जिसे बाद में फिर से रोक दिया गया था। ईरान का पैसा कतर, दक्षिण कोरिया, इराक, जापान, चीन, भारत और लक्जमबर्ग जैसे कई देशों में फंसा रहा है, जिसकी कुल रकम 1.5 अरब डॉलर से लेकर 20 अरब डॉलर तक आंकी गई है।

ईरान का कड़ा रुख और होर्मुज जलडमरूमध्य पर नया पेंच

जून के महीने में गवर्नर अब्दोलनासर हेम्मती ने जनता के सामने यह बयान दिया था कि ईरान को मिलने वाले पैसों से अमरीकी कृषि उत्पाद यानी एग्रीकल्चर प्रोडक्ट्स खरीदने की कोई मजबूरी नहीं है। उनका साफ कहना था कि इन पैसों का इस्तेमाल केवल जरूरी सामान और दवाइयां खरीदने के लिए किया जाएगा। लेकिन अब समय के साथ ईरान की सरकार ने अपना रुख बहुत सख्त कर लिया है।

मौजूदा हालात में ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की शर्त को पूरी तरह बदल दिया है। अब ईरान का कहना है कि जलडमरूमध्य तभी खुलेगा जब समुद्री नाकाबंदी पूरी तरह से हटाई जाएगी, उनका सारा रुका हुआ पैसा वापस किया जाएगा और सभी तरह के प्रतिबंध हमेशा के लिए खत्म किए जाएंगे। ईरान की यह नई मांग जून के महीने में बनी सहमति के मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग से बिल्कुल अलग है, जिससे आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मुश्किलें और ज्यादा बढ़ सकती हैं।

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