Iran-China Chamber: अमेरिका के नए प्रतिबंधों के बाद ईरान और चीन ने दी चेतावनी, आर्थिक युद्ध की शुरुआत.

Sushma Kumari25 August 20263 min read66 viewsWorld
Iran-China Chamber: अमेरिका के नए प्रतिबंधों के बाद ईरान और चीन ने दी चेतावनी, आर्थिक युद्ध की शुरुआत.

ईरान और चीन के बीच व्यापारिक संबंधों को लेकर एक बार फिर से तनाव काफी ज्यादा बढ़ गया है और दोनों देशों के अधिकारियों ने मिलकर अमेरिका के खिलाफ बड़ा बयान दिया है। Iran-China Chamber of Commerce and Industry के अध्यक्ष Majidreza Hariri ने अमेरिका पर सीधा आरोप लगाया है कि वह तेहरान के खिलाफ आर्थिक युद्ध लड़ रहा है। उन्होंने 25 अगस्त 2026 को यह साफ कहा कि अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump के बयानों से ऐसा साफ पता चलता है कि अब मामला सुरक्षा और सैन्य टकराव की तरफ आगे बढ़ रहा है। इस स्थिति को देखते हुए उन्होंने यह भी ऐलान कर दिया है कि अब अमेरिका और उसके साथियों के आर्थिक हितों को वैध सैन्य निशाना माना जाएगा।

Operation Economic Outcast और नए प्रतिबंध

यह पूरा तनाव तब और ज्यादा बढ़ गया जब अमेरिका ने Operation Economic Outcast नाम से एक बड़ा और कड़ा प्रतिबंध कार्यक्रम शुरू किया। इस पूरी योजना को अमलीजामा पहनाने के पीछे अमेरिकी Treasury Secretary Scott Bessent का मुख्य हाथ है। इस प्रोग्राम का मुख्य मकसद ईरान को पूरी दुनिया की वित्तीय व्यवस्था से अलग-थलग करना है। इसके तहत ईरान के डिजिटल एसेट्स, टेक्नोलॉजी, सोना, विमानन और शिपिंग सेक्टर को मुख्य रूप से निशाना बनाया जा रहा है। अमेरिकी सचिव Scott Bessent ने यह भी चेतावनी दी है कि जो भी संस्था ईरान के तेल व्यापार, बैंकिंग या शिपिंग में मदद करेगी, उस पर कड़े सेकेंडरी प्रतिबंध लगाए जाएंगे। उन्होंने खास तौर पर यह भी कहा कि चीनी वित्तीय संस्थान अगर ईरानी तेल को कमाई में बदलते हैं तो उन्हें इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग को यह उम्मीद है कि इस हफ्ते के अंत तक वे किसी बड़े वित्तीय संस्थान पर प्रतिबंध लगा देंगे।

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चीन और ईरान का आधिकारिक रुख

अमेरिका के इन कड़े फैसलों और दबाव की राजनीति के खिलाफ चीन का विदेश मंत्रालय भी पूरी तरह से सामने आ गया है। चीनी मंत्रालय ने अमेरिका के इन तरीकों की कड़ी निंदा की है और यह साफ कर दिया है कि ईरान के साथ उनका सहयोग अंतरराष्ट्रीय कानून के दायरे में ही हो रहा है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी है कि अगर चीन के हितों को कोई नुकसान पहुंचाया गया तो वे इसका जवाब दे सकते हैं। दूसरी तरफ, ईरान के सरकारी अधिकारी भी इन अमेरिकी फैसलों के खिलाफ लगातार आवाज उठा रहे हैं। ईरान के Economy Minister Ali Madanizadeh ने यह दावा किया है कि तेहरान के पास इन सभी मुश्किलों से निपटने के लिए पूरे साधन मौजूद हैं। उन्होंने यह भी साफ किया कि न तो चीन और न ही रूस ने अमेरिका के इन आदेशों को स्वीकार किया है। इसके अलावा, संसद के स्पीकर Mohammad Baqer Qalibaf ने पहले ही 24 अगस्त को यह कह दिया था कि ईरान के व्यापारिक साझेदार अमेरिका की धमकियों को कोई बहुत बड़ी या गंभीर चेतावनी नहीं मानते हैं।

तेल निर्यात पर असर और नौसेना की नाकाबंदी

यह पूरा तनाव ऐसे समय में सामने आया है जब ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियान को लगभग छह महीने पूरे होने वाले हैं। इसके अलावा पिछले जून महीने में हुआ कमजोर समझौता भी अब लगभग टूट चुका है। जुलाई के बीच में अमेरिकी नौसेना ने ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी फिर से शुरू कर दी थी, जिसकी वजह से चीन को होने वाला तेल का निर्यात बहुत ज्यादा कम हो गया है। Majidreza Hariri ने पहले ही 22 अगस्त को यह अनुमान लगाया था कि इस नौसेना की नाकाबंदी की वजह से ईरान की अर्थव्यवस्था पर $18 billion यानी 18 अरब डॉलर का भारी बोझ पड़ सकता है। उन्होंने यह भी बताया था कि अब चीन से आने वाले सड़क मार्ग के परिवहन का खर्च समुद्री रास्ते के मुकाबले चार गुना ज्यादा महंगा हो गया है।

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