Iran Currency Fall: ईरान के केंद्रीय बैंक के गवर्नर ने कहा करेंसी में गिरावट सिर्फ एक अस्थायी बात है।

सोमवार, 24 अगस्त 2026 को ईरान के सेंट्रल बैंक के गवर्नर Abdolnaser Hemmati ने एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि हाल ही में ईरानी रियाल में जो भारी गिरावट आई है, वह सिर्फ एक अस्थायी उतार-चढ़ाव है। गवर्नर साहब ने इस गिरती हुई करेंसी के लिए अमेरिकी राजनीतिक प्रोपेगैंडा और प्रतिबंधों की धमकियों को जिम्मेदार ठहराया है। उनका मानना है कि इन सब चीजों से देश की अर्थव्यवस्था पर कोई स्थायी असर नहीं पड़ने वाला है और हालात जल्द ही सुधर जाएंगे।
अनौपचारिक बाजारों में रियाल का रिकॉर्ड निचला स्तर
सोमवार के दिन अनौपचारिक बाजारों में ईरानी रियाल गिरकर अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। बाजार में एक अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रियाल की कीमत लगभग 2.02 मिलियन तक दर्ज की गई। पिछले दो हफ्तों में इस करेंसी की वैल्यू में करीब 10 प्रतिशत की गिरावट आ चुकी है, जिसमें अकेले पिछले सात दिनों में 7 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट शामिल है। हालांकि ईरान का केंद्रीय बैंक आधिकारिक एक्सचेंज रेट करीब 1.5 मिलियन रियाल प्रति डॉलर बताता है, लेकिन आम जनता को खुले बाजार के कमजोर रेट की वजह से काफी ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। देश में पहले से ही दो अंकों में महंगाई दर चल रही है और आर्थिक विकास दर भी माइनस में है।
अमेरिका और यूएई की तरफ से बढ़ता आर्थिक दबाव
ईरान की अर्थव्यवस्था पर संकट उस समय और गहरा गया जब अमेरिका के ट्रेजरी सचिव Scott Bessent ने एक बड़े अभियान की तैयारी शुरू की। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यह दुनिया का सबसे बड़ा समन्वित आर्थिक अलगाव अभियान होगा, जिसका मकसद ईरानी शासन के सभी वित्तीय रास्तों को पूरी तरह से बंद करना है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने भी ईरान की अर्थव्यवस्था को कमजोर करने के लिए सख्त कदम उठाने की बात कही है। इन सबके बीच United Arab Emirates ने भी ईरान के साथ सभी प्रकार के व्यापार और वित्तीय लेन-देन को पूरी तरह से सस्पेंड करने का ऐलान कर दिया है, जिससे स्थिति और ज्यादा गंभीर हो गई है।
आम जनता पर महंगाई की भारी मार
इस आर्थिक संकट का सबसे बुरा असर वहां के आम लोगों की जिंदगी पर पड़ रहा है। देश में खाने-पीने की चीजों के दाम आसमान छू रहे हैं और फूड इन्फ्लेशन 100 प्रतिशत से भी ऊपर निकल गई है। मौजूदा संघर्ष की शुरुआत से लेकर अब तक चावल की कीमत में करीब 60 प्रतिशत और बीस के दामों में 150 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी हो चुकी है। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी IMF का अनुमान है कि इस साल ईरान की जीडीपी में 5 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट आ सकती है।
होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव और ग्लोबल शिपिंग पर असर
मुश्किल हालातों के बावजूद ईरान ग्लोबल मार्केट पर अपना दबाव बनाए हुए है। देश की तरफ से होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों से टोल की मांग की जा रही है। साथ ही, इस रणनीतिक जलमार्ग के संयुक्त प्रबंधन को लेकर ओमान के साथ बातचीत भी जारी है, जिसकी वजह से दुनिया भर का शिपिंग ट्रैफिक बुरी तरह से प्रभावित हुआ है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ गई है।