Iran Currency Crisis: ईरान की करंसी में ऐतिहासिक गिरावट, एक अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रियाल पहुंचा 20 लाख के पार.

अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबंधों के बीच ईरान की अर्थव्यवस्था को बहुत बड़ा झटका लगा है और वहां की करेंसी रियाल में भारी गिरावट दर्ज की गई है। सोमवार, 24 अगस्त 2026 को ईरान का रियाल लुढ़ककर अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है, जहां खुले बाजार में एक अमेरिकी डॉलर की कीमत 2,026,000 रियाल दर्ज की गई है। बोनबास्ट और टीजीजेयू जैसी ट्रैकिंग वेबसाइटों के अनुसार, पिछले दिन के मुकाबले इसमें 1.05% की बढ़ोतरी हुई है। ईरान के केंद्रीय बैंक की आधिकारिक दर भले ही करीब 1.5 मिलियन रियाल पर बनी हुई है, लेकिन आम बाजारों में लोकल लेनदेन खुले बाजार के हिसाब से ही हो रहे हैं। इस भारी गिरावट के कारण पिछले एक हफ्ते में ही इस करेंसी की वैल्यू 7% से ज्यादा कम हो चुकी है। इस गंभीर आर्थिक संकट के बारे में विस्तार से जानने के लिए आप News on Air की रिपोर्ट देख सकते हैं।
कड़े प्रतिबंध और अमेरिकी चेतावनी
यह आर्थिक संकट अमेरिका और ईरान के बीच जून में हुए एक समझौते की समय सीमा खत्म होने के बाद और गहरा गया है, जो किसी भी तरह के परमाणु या प्रतिबंध राहत समझौते तक पहुंचने में पूरी तरह नाकाम रहा था। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेन्ट ने हाल ही में घोषणा की है कि अमेरिका ईरान पर नए और बेहद कड़े प्रतिबंध लगाने की तैयारी कर रहा है। इन नए कदमों को 'इकोनॉमिक डी-डे' का नाम दिया गया है, जिसका मुख्य मकसद ईरानी शासन के सभी वित्तीय रास्तों को पूरी तरह से बंद करना है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने उन देशों को गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी है जो अमेरिका के इन कदमों में उसका साथ देंगे। वहीं, ईरान के सशस्त्र बलों के चीफ ऑफ स्टाफ मेजर जनरल अली अब्दुल्लाही ने अमेरिकी धमकियों का कड़ा और विनाशकारी जवाब देने की बात कही है।
घरेलू बाजार में महंगाई और रोजमर्रा की मुश्किलें
ईरान के आम नागरिकों को देश के भीतर भयंकर महंगाई का सामना करना पड़ रहा है, जहां पॉइंट-टू-पॉइंट महंगाई दर बढ़कर 88% तक पहुंच गई है। हालांकि सेंट्रल बैंक ऑफ ईरान ने वित्तीय वर्ष के अंत में 77 ट्रिलियन टोमन का शुद्ध मुनाफा होने की बात कही है, लेकिन आर्थिक एक्सपर्ट्स का साफ कहना है कि यह फायदा सिर्फ मुद्रा के अवमूल्यन और बिना समर्थन के नोट छापने की वजह से दिख रहा है। केंद्रीय बैंक ने परिवारों के लिए जरूरी सामानों की इलेक्ट्रॉनिक करेंसी सब्सिडी बास्केट को बढ़ाकर 1.23 मिलियन टोमन प्रति परिवार कर दिया है, जबकि पिछले एक साल में इन जरूरी चीजों की असल कीमतों में 66% की भारी बढ़ोतरी हो चुकी है।
यूएई का बड़ा कदम और तेल निर्यात पर असर
इस पूरे मामले में क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बड़े बदलाव देखने को मिले हैं। संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE ने पिछले हफ्ते ईरान के साथ सभी तरह के वित्तीय लेनदेन पूरी तरह से सस्पेंड कर दिए हैं। इसके अलावा, ईरान के सेंट्रल बैंक के गवर्नर अब्दोलनासर हेम्मती ने खुद इस बात को स्वीकार किया है कि देश से कच्चे तेल यानी क्रूड ऑयल का निर्यात लगभग पूरी तरह से बंद हो चुका है। आर्थिक तंगी से परेशान होकर 23 अगस्त को औद्योगिक और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े पेंशनभोगियों ने सड़कों पर उतरकर जोरदार प्रदर्शन किया और देश की बदतर होती जीवन शैली के लिए गलत विदेश नीति को जिम्मेदार ठहराया। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र यानी UN ने भी ईरान के बैंकिंग, फाइनेंस और तेल सेक्टर को निशाना बनाते हुए नए प्रतिबंध फिर से लागू कर दिए हैं, जिससे आम जनता की मुश्किलें और ज्यादा बढ़ गई हैं।