Qatar News: ईरान ने कतर से मांगे तीन लापता पायलटों पर जवाब, कहा हमारे लोग अभी भी हैं वहां कैद

ईरान के विदेश मंत्रालय ने 2 मार्च 2026 को हुई एक बड़ी घटना के बाद अपने तीन लापता लड़ाकू विमान चालकों को कतर में कैदी के रूप में आधिकारिक तौर पर घोषित कर दिया है। इस मामले को लेकर दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनाव काफी ज्यादा बढ़ गया है। ईरानी प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने 17 अगस्त को यह जानकारी दी कि ईरान अपने पायलटों जावेद सालेही, अब्दोलमजीद दश्तियान और ओम्रान बेहरावेशियन की स्थिति का पता लगाने के लिए अपनी कोशिशें लगातार जारी रखेगा। सरकार का कहना है कि वह इन पायलटों की किस्मत का सच सामने लाने के लिए हर मुमकिन प्रयास करेगी और पीछे नहीं हटेगी।
रेड क्रॉस से की गई थी अपील
यह पूरा मामला तब और गर्मा गया जब 15 अगस्त को जनरल मोहम्मद बाघरजादेह ने इंटरनेशनल कमेटी ऑफ द रेड क्रॉस से गुहार लगाई। उन्होंने दावा किया कि ये तीनों पायलट घटना के छह महीने बाद भी जिंदा पकड़े गए थे और कतर की हिरासत में हैं। इस दावे के सामने आने के बाद से ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस पर चर्चा शुरू हो गई है कि आखिर उस दिन आसमान में क्या हुआ था जब दो ईरानी Su-24 जेट नीचे गिराए गए थे। कतर के एयरस्पेस में घुसने के बाद इन विमानों को निशाना बनाया गया था जिसके बाद से ही ये पायलट लापता बताए जा रहे थे।
कतर सरकार ने सभी आरोपों को नकारा
दूसरी तरफ कतर के अधिकारियों ने ईरान के इन सभी दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। कतर का कहना है कि उनके द्वारा दिए गए बयान और सर्च एंड रेस्क्यू यानी खोज और बचाव अभियान की रिपोर्ट बिल्कुल अलग हैं और ईरान के आरोप भ्रामक हैं। कतर प्रशासन का यह पक्ष है कि उनके सुरक्षा बलों ने अंतरराष्ट्रीय कानून के नियमों का पूरा पालन किया था जब उन विमानों ने बिना अनुमति के देश के हवाई क्षेत्र यानी एयरस्पेस में प्रवेश किया था। कतर ने यह भी साफ किया कि घटना के बाद उन्होंने सिर्फ एक पायलट मजीद काज़मी के अवशेष बरामद किए थे जिन्हें उनके देश वापस भेजने यानी प्रत्यावर्तन के लिए पूरी तैयारी कर ली गई थी।
जांच को लेकर दोनों देशों के बीच तनातनी
हालात तब और ज्यादा तनावपूर्ण हो गए जब कतर ने ईरानी अधिकारियों को खोज अभियानों की पूरी जानकारी देने के लिए अपने यहां आमंत्रित भी किया, लेकिन बात नहीं बनी। ईरान लगातार दोहा पर यह आरोप लगा रहा है कि वह किसी भी विशेषज्ञ टीम को वहां आने की अनुमति नहीं दे रहा है और इस तरह से मामले की स्वतंत्र जांच में रुकावट पैदा कर रहा है। इन सब बातों की वजह से दोनों पड़ोसी देशों के बीच एक लंबा गतिरोध पैदा हो गया है जो थमने का नाम नहीं ले रहा है। आम लोग और खासकर खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासी इस घटनाक्रम पर अपनी नजर बनाए हुए हैं क्योंकि इस तरह के तनाव से पूरे क्षेत्र की सुरक्षा पर असर पड़ता है।