Strait of Hormuz Update: ईरान ने अमेरिका के सामने रखी बड़ी शर्तें, कहा जब तक मांगें पूरी नहीं होंगी तब तक बंद रहेगा रास्ता।

तेहरान और वाशिंगटन के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है, और अब ईरान ने साफ कर दिया है कि जब तक अमेरिका अपनी नीतियों में बदलाव नहीं करता तब तक दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य को नहीं खोला जाएगा। 11 अगस्त 2026 को राज्य मीडिया की रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहसेन रेजाई ने यह बड़ा ऐलान किया है। इस कड़े रुख के बाद खाड़ी देशों और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल तेज हो गई है, जिसका सीधा असर व्यापार और आम लोगों की यात्रा पर पड़ रहा है।
ईरान की क्या हैं मुख्य मांगें
हाल ही में ईरान के सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव नियुक्त किए गए मोहसेन रेजाई ने स्पष्ट किया है कि ईरान की शर्तों में नौसेना की नाकाबंदी को खत्म करना, आर्थिक प्रतिबंधों को हटाना और फ्रीज की गई ईरानी संपत्तियों को वापस करना शामिल है। इसके अलावा ईरान चाहता है कि अमेरिका इस क्षेत्र से अपनी फौजों को पूरी तरह से हटा ले और युद्ध हर्जाने का भुगतान करे। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची और विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने भी इस रुख का समर्थन किया है। उनका कहना है कि केवल कूटनीति से इस मामले को हल नहीं किया जा सकता जब तक अमेरिका इन सभी पूर्व शर्तों को पूरा नहीं करता।
अमेरिका और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का पक्ष
दूसरी ओर अमेरिका का रुख पूरी तरह से इसके विपरीत है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पुराने हमलों के लिए ईरान से मुआवजे की मांग की है। उनका दावा है कि अमेरिकी नौसेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य को खानों (mines) से पूरी तरह साफ कर दिया है और अब यह रास्ता पूरी तरह से खुल चुका है जो 100% अमेरिकी नियंत्रण में है। हालांकि जमीनी हकीकत कुछ और ही बया करती है। राष्ट्रपति ट्रंप के इस दावे के बावजूद यह जरूरी जलमार्ग जहाजों के लिए लगभग बंद ही है। आंकड़ों के अनुसार 10 अगस्त को इस रास्ते से केवल छह जहाज ही गुजर पाए, जबकि संघर्ष से पहले रोजाना यहां से 130 से 140 जहाज निकलते थे।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और कूटनीतिक प्रयास
दुनियाभर के देश इस स्थिति पर कड़ी नजर बनाए हुए हैं ताकि तेल और सामानों की सप्लाई पर असर न पड़े। जर्मनी के विदेश मंत्री जोहान वाडेफुल ने जोर देकर कहा है कि बिना किसी शर्त के होर्मुज जलडमरूमध्य को खोला जाना चाहिए ताकि जहाजों की आवाजाही सुरक्षित तरीके से हो सके। वहीं पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने सुझाव दिया है कि अमेरिका और ईरान किसी तरह के समझौते के करीब पहुंच रहे हैं। कतर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने यह भी बताया कि ओमान और ईरान के बीच इस रास्ते पर सुरक्षित आवाजाही को लेकर अलग से बातचीत चल रही है। हालांकि ये बातचीत ईरान की उन बड़ी और व्यापक मांगों से अलग हैं जो वह पूरे रास्ते को फिर से खोलने के लिए रख रहा है।
वर्तमान में अमेरिका और ईरान के बीच सीधी बातचीत का कोई जरिया नहीं बचा है और सारे संदेश तीसरे पक्षों के जरिए ही भेजे जा रहे हैं। समुद्री इलाके में चल रही इस उठापटक के बीच 11 अगस्त को यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस सेंटर (UKMTO) ने ओमान की खाड़ी में एक टैंकर और सैन्य बलों के बीच हुई घटना की रिपोर्ट दी है, जिससे हालात और भी ज्यादा संवेदनशील बन गए हैं।