अमेरिका के इकोनॉमिक डी-डे पर ईरान का पलटवार, विदेश मंत्री ने दी कड़ी चेतावनी.

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर से बहुत ज्यादा बढ़ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा आर्थिक अभियान शुरू करने का ऐलान किया है। अमेरिकी प्रशासन इसे Economic D-Day और आर्थिक युद्ध बता रहा है। अमेरिका ने साफ कह दिया है कि जो भी देश या कंपनी ईरान की मदद करेगी, उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। लेकिन ईरान ने अमेरिका की इन धमकियों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है और इसे नाकाम नीति बताया है।
ईरान का कड़ा रुख और आधिकारिक बयान
ईरान के विदेश मंत्री Seyed Abbas Araghchi ने 21 अगस्त 2026 को कहा कि अमेरिका की तरफ से दी जा रही ये धमकियां एक पुरानी फिल्म की तरह हैं जो पहले भी फेल हो चुकी हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि अमेरिका अपने देश की आर्थिक परेशानियों और बढ़ते कर्ज से ध्यान भटकाने के लिए ऐसा कर रहा है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने इन नए प्रतिबंधों को आर्थिक आतंकवाद और मानवता के खिलाफ अपराध करार दिया है। ईरानी संसद के स्पीकर Mohammad Baqer Qalibaf ने कहा कि ये धमकियां यह दिखाती हैं कि अमेरिका युद्ध के मैदान में ईरान से मुकाबला नहीं जीत सकता है। इसके अलावा ईरान के सशस्त्र बलों के चीफ ऑफ स्टाफ Ali Abdollahi ने भी चेतावनी दी है कि ईरान इन नई धमकियों का बहुत ही कड़ा और विनाशकारी जवाब देगा।
अमेरिका और उसके सहयोगियों की तैयारी
इस बीच अमेरिकी अधिकारियों ने अपनी रणनीति साफ कर दी है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance ने पुष्टि की है कि दोनों देशों के बीच संघर्ष अब आर्थिक दबाव के एक नए दौर में प्रवेश कर चुका है। वहीं ट्रेजरी सचिव Scott Bessent ने घोषणा की है कि अमेरिका इतिहास के सबसे कड़े प्रतिबंध लगाने जा रहा है। इन प्रतिबंधों के बारे में पूरी जानकारी 24 अगस्त 2026 को सामने आएगी। अमेरिकी प्रशासन ने अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों और चीन से अपील की है कि वे ईरान को दुनिया भर में आर्थिक रूप से अलग-थलग करने के इस अभियान में साथ दें। हालांकि चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Lin Jian ने 21 अगस्त को साफ कर दिया कि अमेरिका के प्रतिबंधों और दबाव से कोई समस्या हल नहीं होगी और इसके बजाय बातचीत से रास्ता निकाला जाना चाहिए।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव बरकरार
दोनों देशों के बीच यह तनाव ऐसे समय में और ज्यादा भड़क गया है जब 17 अगस्त 2026 को बातचीत के लिए बना 60 दिन का समझौता बिना किसी नतीजे के खत्म हो गया था। इसके बाद अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने 20 अगस्त को हिजबुल्लाह को फिर से ईरान सरकार और आईआरजीसीकुद्स फोर्स की तरफ से काम करने के लिए प्रतिबंधित सूची में डाल दिया। खाड़ी क्षेत्र में हालात अभी भी बहुत तनावपूर्ण बने हुए हैं क्योंकि फारस की खाड़ी के पास हॉर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी अभी भी जारी है और हाल ही में USS George Washington युद्धपोत ने USS Abraham Lincoln की जगह ली है।