ईरान ने दी सैन्य शक्ति की हुंकार, मुस्लिम देशों को एकजुट होने का दिया बुलावा, कहा बाहरी ताकतों से है खतरा

ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने 7 अगस्त 2026 को एक बड़ा बयान दिया है, जिसमें उन्होंने देश की सैन्य क्षमता को दुनिया की सबसे महंगी सेनाओं के मुकाबले खड़ा बताया है। उन्होंने क्षेत्रीय एकजुटता पर जोर देते हुए मुस्लिम देशों से आपसी भाईचारा बढ़ाने और बाहरी ताकतों के खिलाफ एक मंच पर आने की अपील की है। ईरान का यह रुख ऐसे समय में सामने आया है जब क्षेत्र में तनाव लगातार बना हुआ है और देश अपनी सुरक्षा को लेकर सख्त तेवर अपनाए हुए है।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का नियंत्रण और नई कूटनीति
क्षेत्रीय तनाव के बीच ईरान ने साफ किया है कि Strait of Hormuz का रास्ता सभी देशों के जहाजों के लिए खुला रहेगा, सिवाय अमेरिका और इसराइल के। इस दौरान, ईरान और Oman के बीच एक कमर्शियल शिपिंग कॉरिडोर बनाने के लिए बातचीत अंतिम दौर में है, जो समुद्री व्यापार की दिशा को बदल सकता है। यह विकास कार्य क्षेत्र में ईरान की पकड़ और रणनीतिक महत्व को दर्शाता है।
ईरान-अमेरिका वार्ता और क्षेत्रीय सुरक्षा समझौता
जेनेवा में आयोजित ईरान और अमेरिका के बीच दूसरे दौर की बातचीत के बारे में बताते हुए विदेश मंत्री ने इसे धीमा लेकिन सकारात्मक बताया है, हालांकि कई बड़े मुद्दों पर अभी तक सहमति नहीं बन पाई है। इसी दिन, Turkey, Saudi Arabia और Pakistan ने मक्का में एक आपसी रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। ईरान के अधिकारियों ने इस समझौते को ईरान की मिसाइल शक्ति से जोड़कर देखा है, जिससे क्षेत्र की राजनीति और अधिक जटिल हो गई है।
घरेलू मोर्चे पर सरकार के सामने चुनौतियां
ईरान की घरेलू राजनीति में भी हलचल तेज है। 4 अगस्त 2026 को ईरान के कुछ रूढ़िवादी सांसदों ने विदेश मंत्री Abbas Araghchi को उनके बयानों के कारण पद से हटाने की चेतावनी दी थी। ये सांसद अमेरिका और इसराइल के साथ हो रही चर्चाओं और किसी भी ऐसे समझौते के खिलाफ हैं जो ईरान की संप्रभुता पर आंच डालता हो। यह घटनाक्रम बताता है कि ईरान सरकार को अंतरराष्ट्रीय मोर्चे के साथ-साथ अपने घर के भीतर भी भारी विरोध का सामना करना पड़ रहा है।
क्षेत्र में बढ़ते इन घटनाक्रमों का सीधा असर वहां काम करने वाले प्रवासियों और व्यापार पर पड़ सकता है। ईरान का दावा है कि उसने अप्रैल और मई 2026 के दौरान अमेरिकी F-35 फाइटर जेट्स को मार गिराया था, जो सैन्य तनाव को और अधिक बढ़ाता है। Gulf देशों में रहने वाले लोगों के लिए यह स्थिति सतर्क रहने की आवश्यकता पैदा करती है, क्योंकि कोई भी बड़ा सैन्य बदलाव समुद्री आवाजाही और तेल की कीमतों पर असर डाल सकता है।