Iran News: होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान का कड़ा रुख, नियमों का उल्लंघन करने वाले जहाजों पर होगी सख्त कार्रवाई.

Aanya24 August 20264 min read61 viewsWorld
Iran News: होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान का कड़ा रुख, नियमों का उल्लंघन करने वाले जहाजों पर होगी सख्त कार्रवाई.

दुनिया के सबसे संवेदनशील और अहम ऊर्जा मार्गों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान ने बहुत कड़ा रुख अपना लिया है। ईरान की पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी (पीजीएसए) ने साफ कर दिया है कि जो जहाज उनके तय किए गए नियमों का पालन नहीं करेंगे, उन्हें भविष्य में इस रास्ते से गुजरने पर भारी प्रतिबंधों का सामना करना पड़ेगा। इस चेतावनी के बाद से अंतरराष्ट्रीय शिपिंग जगत और व्यापारिक हलकों में हलचल तेज हो गई है, क्योंकि इस रूट पर सख्ती बढ़ने से वैश्विक स्तर पर माल ढुलाई और ऊर्जा बाजार पर सीधा असर पड़ सकता है। खाड़ी देशों में काम करने वाले प्रवासियों और भारत के साथ व्यापार करने वाले लोगों के लिए भी यह एक बड़ी चिंता का विषय बनता जा रहा है, क्योंकि समुद्री रास्ते बंद होने या बाधित होने से कई तरह की जरूरी चीजों की आवाजाही प्रभावित होती है।

शिपिंग कंपनियों के लिए जारी की गई खास सूची

ईरान की अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी प्रेस टीवी और तुर्किए की सरकारी समाचार एजेंसी अनाडोलू की रिपोर्ट के मुताबिक, पीजीएसए ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक जरूरी बयान जारी किया है। इस बयान में पर्शियन गल्फ से सामान लाने और ले जाने वाली सभी शिपिंग कंपनियों के साथ-साथ कार्गो मालिकों को सख्त निर्देश दिए गए हैं। अथॉरिटी ने कहा है कि वे किसी भी जहाज को किराए पर लेने से पहले नियमों का पालन न करने वाले यानी एनसीवी की अपडेटेड सूची की अच्छी तरह जांच कर लें। अगर कोई जहाज इस सूची में शामिल पाया जाता है, तो उसे तुरंत जब्ती और भारी जुर्माने जैसी सख्त कार्रवाइयों का सामना करना पड़ सकता है।

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दूसरे जहाजों पर भी गिरेगी गाज

ईरानी अथॉरिटी ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि केवल नियम तोड़ने वाले जहाज ही नहीं, बल्कि जो दूसरे जहाज सूची में शामिल जहाजों के साथ किसी भी तरह का सहयोग करेंगे, उन्हें भी तत्काल प्रभाव से एनसीवी सूची में डाल दिया जाएगा। इस तरह के सहयोग में शिप-टू-शिप ट्रांसफर यानी एसटीएस, ट्रांसशिपमेंट और अन्य प्रकार की व्यावसायिक गतिविधियां शामिल हैं। जिन जहाज मालिकों के नाम इस सूची में आ चुके हैं और जो अपना नाम हटवाना चाहते हैं, उन्हें उचित कारणों के साथ एक औपचारिक आवेदन भेजना होगा। इसके लिए अथॉरिटी ने आधिकारिक ईमेल आईडी info@pgsa.ir जारी की है, जिसके जरिए आवेदन भेजने की पूरी प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

पहले से ही ठप पड़ा है समुद्री यातायात

ईरान की तरफ से यह नई घोषणा ऐसे समय पर सामने आई है जब होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही पहले से ही बहुत ज्यादा प्रभावित चल रही है। रॉयटर्स से मिली जानकारी के अनुसार, 23 अगस्त को समाप्त हुए सप्ताह में केवल 89 मालवाहक जहाज इस जलडमरूमध्य से बाहर निकले और 103 जहाज अंदर आए। यह आंकड़ा संघर्ष शुरू होने से पहले के सामान्य स्तर की तुलना में लगभग 90 प्रतिशत तक कम है। अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन यानी आईएमओ के आंकड़ों के अनुसार, 21 अगस्त तक इस क्षेत्र में कुल 68 पुष्ट समुद्री घटनाएं दर्ज की जा चुकी हैं, जिनमें 19 नाविकों की जान भी जा चुकी है। इन आंकड़ों से साफ पता चलता है कि समुद्री सफर कितना खतरनाक और जोखिम भरा हो चुका है।

वैश्विक ऊर्जा बाजार और व्यापार पर बड़ा असर

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक माना जाता है। पर्शियन गल्फ क्षेत्र से निकलने वाला तेल और गैस का एक बहुत बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर दुनिया भर के अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचता है। ऐसे में यदि इस रास्ते पर किसी भी तरह की पाबंदी या सख्ती बढ़ाई जाती है, तो इसका सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार और शिपिंग की लागत पर पड़ेगा। ईरान पहले भी यह बात कई बार कह चुका है कि जलडमरूमध्य को लेकर उसकी सुरक्षा चिंताओं और शर्तों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। ईरान का यह भी कहना रहा है कि इस रास्ते को पूरी तरह सामान्य रूप से खोलने के लिए अमेरिका को अपने रवैये में बदलाव लाना होगा।

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव

होर्मुज के रास्ते को लेकर ईरान और अमेरिका के बीच चल रहा गतिरोध थमने का नाम नहीं ले रहा है। पिछले दिनों जून के महीने में पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता से दोनों पक्षों के बीच एक अंतरिम समझौता जरूर हुआ था, लेकिन बाद में उसके लागू होने के तरीकों और जहाजों की आवाजाही को लेकर दोनों देशों के बीच मतभेद सामने आ गए। देखते ही देखते 17 अगस्त को इस समझौते की समयसीमा भी समाप्त हो गई और कोई स्थायी सहमति नहीं बन पाई। इस वजह से बड़ी संख्या में वाणिज्यिक जहाज अभी भी खाड़ी क्षेत्र के समंदर में फंसे हुए हैं। पीजीएसए की इस ताजा चेतावनी से शिपिंग कंपनियों पर नियमों का पालन करने का दबाव और अधिक बढ़ गया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार की अनिश्चितता और ज्यादा गहरी होती जा रही है।

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