ईरान का बड़ा कदम, अमेरिका और इसराइल के खिलाफ सबूत जुटाने के लिए एनजीओ की लेगा मदद.

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmaeil Baghaei ने 23 अगस्त 2026 को यह ऐलान किया कि तेहरान सरकार अब गैर-सरकारी संगठनों यानी एनजीओ की मदद लेने जा रही है। इसका मुख्य मकसद अमेरिका और इसराइल द्वारा किए गए कथित अपराधों के पुख्ता सबूत इकट्ठा करना है। इस योजना के तहत सरकार घरेलू और अंतरराष्ट्रीय अदालतों में इन देशों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई को और ज्यादा मजबूत करेगी ताकि मामलों को सही तरीके से आगे बढ़ाया जा सके।
आर्थिक प्रतिबंधों को लेकर तीखी प्रतिक्रिया
यह घोषणा प्रवक्ता द्वारा अगस्त महीने के आखिरी दिनों में दिए गए बयानों के बाद सामने आई है। 22 अगस्त 2026 को प्रवक्ता ने अमेरिका द्वारा लगाए गए नए आर्थिक प्रतिबंधों की कड़ी आलोचना की थी। उन्होंने इन सख्त कदमों को आर्थिक युद्ध करार दिया और कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय कानूनों का खुला उल्लंघन है। उनके अनुसार इन माध्यमिक प्रतिबंधों का कोई कानूनी आधार नहीं है और यह राज्यों की संप्रभुता के सिद्धांतों के खिलाफ हैं।
अपनी बात को साबित करने के लिए उन्होंने संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 2(1) और अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के निकारागुआ मामले के फैसले का हवाला दिया। उन्होंने साफ कहा कि इस तरह का आर्थिक दबाव बनाना एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गलत काम है। इसके साथ ही उन्होंने वाशिंगटन पर ईरानी जहाजों और बंदरगाहों के खिलाफ अवैध नौका नाकाबंदी करने की कोशिश करने का भी गंभीर आरोप लगाया।
औपनिवेशिक मानसिकता और सैन्य आक्रामकता
ईरान के विदेश मंत्रालय ने इन सभी संयुक्त उपायों को सैन्य आक्रामकता और दूसरे देशों की संप्रभुता को कमजोर करने की एक सोची-समझी चाल बताया। प्रवक्ता ने इन हरकतों को पुराने जमाने के उपनिवेशवाद की वापसी जैसा बताया। ईरान लगातार अमेरिका और इसराइल को नरसंहार, युद्ध अपराध, मानवता के खिलाफ अपराध और आक्रामकता का मुख्य जिम्मेदार मानता रहा है। हालांकि ईरान पहले भी अंतरराष्ट्रीय निकायों के पास अमेरिकी युद्ध अपराधों का रिकॉर्ड भेजता रहा है, लेकिन अब एनजीओ का इस्तेमाल इस रणनीति का एक बहुत बड़ा हिस्सा बन गया है जिससे इन देशों को जवाबदेह ठहराया जा सके।