ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड का बड़ा दावा, अमेरिका और इसराइल के 200 से ज़्यादा विमान हवा में गिराए

ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के डिप्टी कमांडर-इन-चीफ Major General Mostafa Izadi ने हाल ही में एक बड़ा और चौंकाने वाला आधिकारिक बयान दिया है। उन्होंने बताया कि फरवरी महीने के आखिर से शुरू हुए 40 दिन के संघर्ष के दौरान ईरानी सैन्य बलों ने अमेरिका और इसराइल के 200 से ज़्यादा विमानों को सफलतापूर्वक मार गिराया है। इस पूरे सैन्य टकराव के दौरान कई आधुनिक और महंगे विमानों को निशाना बनाने की बात कही गई है, जिससे पूरी दुनिया में हड़कंप मच गया है।
कौन-कौन से विमान और ड्रोन हुए तबाह
ईरानी सैन्य अधिकारियों की तरफ से जारी की गई सूची के अनुसार, इस संघर्ष में अमेरिका के बेहद आधुनिक माने जाने वाले F-35 स्टील्थ फाइटर जेट, F-15E स्ट्राइक ईगल, C-130 ट्रांसपोर्ट प्लेन और MQ-9 Reaper ड्रोन शामिल हैं। इसके अलावा इसराइल के Hermes-900 ड्रोन को भी निशाना बनाया गया है। ईरान का यह दावा है कि इन लगातार सैन्य कार्रवाइयों और सफल हमलों ने आधुनिक स्टील्थ तकनीक की अजेय होने की धारणा को पूरी तरह से गलत साबित कर दिया है और दुनिया के बड़े देशों की ताकत को चुनौती दी है।
अप्रैल 2026 की घटनाएं और ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस
इससे पहले अप्रैल 2026 में भी कई बड़ी झड़पें देखने को मिली थीं। खातम अल-अंबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर ने उस दौरान अमेरिकी पायलटों के असफल बचाव अभियान के दौरान 2 ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर और 2 सी-130 विमानों को तबाह करने की जानकारी दी थी। हालांकि अमेरिकी पक्ष ने केवल इतना स्वीकार किया था कि उनका एक F-15E विमान क्षतिग्रस्त हुआ था जिसे बाद में आपातकालीन लैंडिंग करनी पड़ी थी। इसके बावजूद ईरान का यह पक्का मानना है कि उनका Operation True Promise four अभियान इस अमेरिकी और इसराइली आक्रामकता का मुकाबला करने में पूरी तरह से कामयाब रहा।
क्षेत्रीय तनाव और भविष्य की रणनीतियां
अमेरिका के साथ हुआ समझौता ज्ञापन समाप्त होने के बाद अब ईरान की तरफ से यह संकेत मिलने लगे हैं कि वे आने वाले समय में अधिक आक्रामक सैन्य रुख अपना सकते हैं। मध्य पूर्व क्षेत्र में लगातार बढ़ते तनाव के बीच इन बड़े सैन्य दावों ने सुरक्षा हालातों को और ज्यादा गंभीर बना दिया है। आम लोगों और खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों के लिए भी यह स्थिति चिंता का विषय बनती जा रही है क्योंकि इस तरह के संघर्षों का सीधा असर क्षेत्रीय स्थिरता और सुरक्षा पर पड़ता है।