Iran Oil Export: ईरान के खरग द्वीप पर थमी तेल सप्लाई, अमेरिका की सख्ती से खाड़ी देशों में खलबली.

ईरान के मुख्य तेल निर्यात केंद्र खरग द्वीप पर 24 अगस्त 2026 को ली गई सैटेलाइट तस्वीरों से यह बात सामने आई है कि वहां तेल का कारोबार लगभग पूरी तरह से बंद हो गया है। द न्यू यॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, इस खजाने वाले स्थान से देश का लगभग 90 प्रतिशत कच्चा तेल बाहर भेजा जाता था, लेकिन अब वहां कोई भी बड़ा जहाज लोडिंग के लिए खड़ा नहीं दिख रहा है और सभी टैंकर समंदर में खाली खड़े हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की ओर से शुरू की गई आर्थिक डी-डे नीति और ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नौसेना की सख्त नाकेबंदी के कारण यह स्थिति पैदा हुई है।
अमेरिका का अधिकतम दबाव और प्रतिबंध
अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने साफ कर दिया है कि ईरान पर अधिकतम दबाव बनाने की इस नीति के तहत आने वाले दिनों में और भी कड़े प्रतिबंध लगाए जाएंगे। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भी उन सभी देशों को कड़ी चेतावनी दी है जो तेल की तस्करी या पैसों के जरिए ईरान की मदद कर रहे हैं, और कहा है कि ऐसा करने वालों को गंभीर आर्थिक परिणाम भुगतने होंगे। इन सब कड़े कदमों के बाद ईरान से होने वाला तेल निर्यात लगभग शून्य पर पहुंच गया है, जिससे वहां की अर्थव्यवस्था बुरी तरह चरमरा गई है.
ईरानी नेतृत्व में आंतरिक तनाव और बयान
इस भारी आर्थिक संकट के कारण ईरान के भीतर ही नेताओं के बीच आपस में मतभेद शुरू हो गए हैं। देश के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने कहा कि किसी न किसी मोड़ पर इस युद्ध को अब खत्म होना ही चाहिए। वहीं दूसरी ओर, संसद के स्पीकर मोहम्मद बागर गालिबाफ ने अपनी बात रखते हुए कहा कि हमारे पास चाहे जितनी भी सैन्य ताकत क्यों न हो, लेकिन अगर हमारे देश के आम लोग संघर्ष कर रहे हैं और देश के अंदर पैसे का लेन-देन तथा आर्थिक विकास रुक गया है, तो हम कभी भी आगे नहीं बढ़ पाएंगे। इसके साथ ही, ईरान के नए सुरक्षा प्रमुख मोहसिन रजाई ने चेतावनी दी है कि जो भी देश ईरान पर लगाए जा रहे आर्थिक प्रतिबंधों में मदद करेगा, उसे ईरान का दुश्मन माना जाएगा.
खाड़ी देशों पर असर और संयुक्त अरब अमीरात का कदम
इस पूरे मामले में संकट तब और ज्यादा बढ़ गया जब ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपना नियंत्रण खो दिया और संयुक्त अरब अमीरात ने सभी तरह के व्यापारिक तथा वित्तीय लेन-देन को पूरी तरह से रोक दिया। यूएई का आरोप है कि तेहरान की तरफ से उसकी सीमा और समुद्री जहाजों की तरफ बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गईं, जिसके बाद वहां सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं और व्यापारिक रिश्ते पूरी तरह से ठप कर दिए गए हैं। खाड़ी देशों में चल रहे इस तनाव का असर वहां रहने वाले आम लोगों और कामगारों पर भी साफ देखा जा रहा है।