Iran Military Doctrine: ईरान ने बदला सैन्य नियम, रक्षात्मक से आक्रामक नीति अपनाने का किया बड़ा ऐलान.

Nura Basta22 August 20262 min read65 viewsWorld
Iran Military Doctrine: ईरान ने बदला सैन्य नियम, रक्षात्मक से आक्रामक नीति अपनाने का किया बड़ा ऐलान.

क्षेत्रीय तनाव के बीच ईरान के सैन्य नेतृत्व ने अपनी नीति में एक बड़ा बदलाव किया है और अब देश ने रक्षात्मक रुख से हटकर आक्रामक सैन्य नीति अपनाने का आधिकारिक ऐलान कर दिया है। 22 अगस्त 2026 को ईरान के सर्वोच्च नेता के एक वरिष्ठ सैन्य सलाहकार ने यह बात कही कि देश को आक्रमक ताकतों के लिए एक स्थाई चेतावनी के रूप में काम करना चाहिए। यह फैसला दुश्मन देशों की कमजोरियों का 21 दिनों तक लगातार जायजा लेने के बाद लिया गया है, जिसके बाद ईरानी सेना के प्रवक्ता ने इस बात की पुष्टि की है कि देश अब पूरी तरह से आक्रामक सैन्य रुख अपना रहा है।

सैन्य अधिकारियों के कड़े बयान और नई रणनीति

सशस्त्र बलों के चीफ ऑफ स्टाफ मेजर जनरल मोहम्मद बाघेरी ने यह स्पष्ट किया कि हालांकि ईरान एक व्यापक रक्षात्मक ढांचे को बनाए रखता है, लेकिन राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए वह आक्रामक रणनीति भी अपनाएगा और किसी भी तरह की आक्रामकता के सामने चुपचाप नहीं बैठेगा। इसके अलावा, ईरानी सेना की जमीनी सेना के कमांडर ब्रिगेडियर जनरल कियोमर्स हैदरी ने भी इस बात की पुष्टि की कि अब उनकी सेना आगे बढ़ने वाली और आक्रामक हो चुकी है। इस बड़े बदलाव से ठीक एक दिन पहले यानी 21 अगस्त 2026 को सशस्त्र बलों के चीफ ऑफ स्टाफ मेजर जनरल अब्दुलहीम अब्दुल्लाही ने भी कड़ी चेतावनी दी थी कि दुश्मनों की किसी भी सैन्य धमकी या गलत गणना का बहुत ही भयानक और पछतावा कराने वाला जवाब दिया जाएगा।

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आर्थिक दबाव और व्यापारिक समझौते

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने कहा कि दुनिया ने अमेरिका पर ईरान की जीत को स्वीकार कर लिया है और अब इस संघर्ष को समाप्त किया जाना चाहिए ताकि देश अपनी आर्थिक स्थिति को सुधारने पर पूरा ध्यान दे सके। इस बीच, संसद के स्पीकर मोहम्मद गालिबफ ने जानकारी दी कि कई पड़ोसी देशों ने तेहरान से संपर्क किया है ताकि क्षेत्रीय सुरक्षा और आर्थिक सहयोग को फिर से आकार दिया जा सके। अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के असर को कम करने के लिए विशेष रूप से इराक के साथ करीबी रिश्ते बनाने की बात पर जोर दिया जा रहा है, जैसा कि Uniindia की रिपोर्ट में बताया गया है।

दूसरी ओर, तेहरान को अमेरिका की तरफ से लगातार भारी आर्थिक दबाव का सामना करना पड़ रहा है। अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघेई द्वारा लगाए गए नए प्रतिबंधों को ईरान ने 'पूर्ण पैमाने पर क्लासिक उपनिवेशवाद' करार दिया है। देश के विदेश मंत्री अब्बास अराकची ने इन सभी उपायों को 'आर्थिक आतंकवाद' बताते हुए खारिज कर दिया और एक बार फिर दोहराया कि ईरान किसी भी तरह की धूमिकियों के आगे नहीं झुकेगा और मौजूदा geopolitical समस्याओं का कोई भी सैन्य समाधान नहीं है। अमेरिका द्वारा लगातार नौसेना की नाकेबंदी और आर्थिक दबाव बनाए रखने के बावजूद, आधिकारिक रिपोर्टों के अनुसार ईरान ने क्षेत्रीय व्यापार को बढ़ावा देने के लिए ओमान के साथ एक पसंदीदा व्यापार समझौते को अंतिम रूप दे दिया है।

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