अमेरिका और ईरान में बढ़ा तनाव, ईरानी नेवी कमांडर ने जलमार्गों की सुरक्षा को लेकर किया बड़ा ऐलान

ईरान और अमेरिका के बीच चल रहा तनाव अब बहुत आगे बढ़ गया है। 21 अगस्त 2026 को ईरानी नेवी के कमांडर Rear Admiral Shahram Irani ने देश की जलमार्गों और जलडमरूमध्य की सुरक्षा करने का कड़ा ऐलान किया है। उन्होंने साफ कहा कि ईरान की सेना देश के हितों की रक्षा करने के लिए पूरी तरह तैयार है और यदि किसी ने भी ईरानी सीमा के पास बदतमीजी की, तो उसे मुंहतोड़ और कड़ा जवाब दिया जाएगा। इस बीच खाड़ी देशों और समुद्र में आने-जाने वाले जहाजों की स्थिति को लेकर भी चिंता लगातार बढ़ती जा रही है।
सेना के बड़े अधिकारियों की चेतावनी और सीजफायर खत्म होने का असर
ईरान के आर्म्ड फोर्सेस के चीफ ऑफ स्टाफ Major General Ali Abdollahi ने भी बयान दिया कि उनकी थल सेना, जल सेना, वायु सेना और साइबर सेना हर तरह के नए खतरों से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। वहीं ईरान के कार्यवाहक रक्षा मंत्री Brigadier General Majid Ebn al-Reza ने कहा कि उनकी तैयारी किसी पर हमला करने की नहीं बल्कि खुद को बचाने की है। ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने यह भी जोड़ा कि अमेरिका के साथ चल रही जंग को खत्म करने का समय आ गया है, लेकिन ईरान किसी के आगे नहीं झुकेगा। यह सारा तनाव उस समय और बढ़ गया जब 17 अगस्त 2026 को दोनों पक्षों के बीच चल रहा सीजफायर बिना किसी समझौते के खत्म हो गया।
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मूज में जहाजों की आवाजाही में भारी गिरावट
डेटा कंपनी Kpler की 20 अगस्त की रिपोर्ट के मुताबिक, जंग से पहले Strait of Hormuz से रोजाना औसतन 130 कमोडिटी जहाज गुजरते थे, जिनकी संख्या घटकर अब सिर्फ 7 रह गई है। हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump का दावा है कि यह रास्ता अभी भी खुला हुआ है और अमेरिकी नेवी ने पानी के भीतर से माइंस हटा दी हैं। अमेरिकी नेवी रात के समय में टैंकरों को सुरक्षित रूप से उस रास्ते से पार करवा रही है ताकि व्यापार पूरी तरह बंद न हो जाए।
ओमान की मध्यस्थता और अमेरिका की आर्थिक सख्ती
एक तरफ जहां हालात खराब हो रहे हैं, वहीं ओमान देश इस रास्ते पर जहाजों की आवाजाही को संभालने के लिए संवेदनशील बातचीत कर रहा है, हालांकि अमेरिकी अधिकारियों की तरफ से इसमें अड़चनें भी आ रही हैं। दूसरी तरफ अमेरिका के ट्रेजरी चीफ Scott Bessent ने घोषणा की है कि ईरान की सरकार को आर्थिक रूप से कमजोर करने के लिए इतिहास के सबसे सख्त वित्तीय प्रतिबंध लगाए जाएंगे। इन प्रतिबंधों का ऐलान 24 अगस्त को होना है। ईरान के संसद के स्पीकर Mohammad Baqer Qalibaf ने अमेरिका और इस्राइल की इन नीतियों को आर्थिक और मानसिक युद्ध करार दिया है। इस पूरे तनाव का असर खाड़ी देशों में काम करने वाले प्रवासियों और वहां की व्यवस्था पर भी साफ देखा जा रहा है।