ईरान के परमाणु प्रमुख का बड़ा बयान, इसफ़हान प्लांट को बताया अमेरिका और इस्राइल के हमलों का मुख्य निशाना.

ईरान के परमाणु प्रमुख ने हाल ही में एक बड़ा बयान जारी किया है जिसमें उन्होंने देश के मुख्य परमाणु संयंत्र को लेकर जानकारी दी है। IRNA News Agency की रिपोर्ट के मुताबिक, यह मामला 23 अगस्त 2026 का है जब ईरान के परमाणु प्रमुख ने यह स्पष्ट किया कि अमेरिका और इस्राइल की तरफ से किए गए संयुक्त हमलों का मुख्य निशाना इसफ़हान न्यूक्लियर फ्यूल प्लांट था। इस बात की पुष्टि ईरान की संसद के डिप्टी स्पीकर ने भी की थी। उन्होंने अपने बयान में बताया कि इसफ़हान कॉम्प्लेक्स के अंदर मौजूद यह ईंधन उत्पादन प्लांट ही इन सभी सैन्य अभियानों का सबसे पहला और मुख्य लक्ष्य था। इस पूरी स्थिति ने मध्य पूर्व के हालातों को लेकर एक नई बहस को जन्म दे दिया है जहाँ अधिकारी लगातार अपनी सुरक्षा और रणनीतियों पर बात कर रहे हैं।
परमाणु अप्रसार संधि पर उठे सवाल
इस पूरी घटना के बीच ईरान की तरफ से अंतरराष्ट्रीय संधियों को लेकर भी कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई है। 23 अगस्त 2026 को ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव Mohsen Rezaei ने एक बयान में कहा कि यह सारे हमले इस बात को साबित करते हैं कि न्यूक्लियर नॉन-प्रोलाइफरेरेशन ट्रीटी यानी NPT और अंतरराष्ट्रीय सहयोग सैन्य आक्रामकता को रोकने में पूरी तरह से नाकाम रहे हैं। उनका यह मानना था कि इस तरह के कदम किसी भी देश की राष्ट्रीय सुरक्षा को कमजोर करते हैं और फिर देशों को अपनी रक्षा के लिए परमाणु हथियार बनाने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है। इसके अलावा उन्होंने अमेरिका की नीतियों को परमाणु असुरक्षा को बढ़ावा देने वाला बताया और पड़ोसी देशों को भी एक सख्त चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि अगर पड़ोसी देश ईरान के खिलाफ चल रहे आर्थिक युद्ध में शामिल होते हैं, तो उनके हितों और तेल शिपिंग रूटों पर भी जवाबी कार्रवाई की जा सकती है।
ईरान की सैन्य रणनीति में बड़ा बदलाव
इसी सिलसिले में आगे बढ़ते हुए ईरानी सेना के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल Mohammad Akraminia ने भी 23 अगस्त 2026 को एक अहम घोषणा की। उन्होंने बताया कि देश की सैन्य नीति अब पूरी तरह से रक्षात्मक यानी डिफेंसिव से बदलकर आक्रामक यानी ऑफेंसिव हो रही है। ईरान ने इससे पहले भी अपने परमाणु ठिकानों पर हमलों की बात कही थी, जिनमें मार्च 2026, जून 2025 और जुलाई 2026 के महीने शामिल थे। तेहरान के अधिकारियों के इन ताजा बयानों से साफ पता चलता है कि वे इसफ़हान के इस साइट को इन सभी हमलों की श्रृंखला में सबसे पहला निशाना मान रहे हैं। इन सभी बयानों और सैन्य बदलावों के बाद क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है और आम लोग तथा अधिकारी इन बदलते हालातों पर अपनी गहरी नजर बनाए हुए हैं।