Iran Oil Exports: अमेरिका के नौसैनिक नाकेबंदी के कारण ईरान का तेल निर्यात 40 प्रतिशत गिरा, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज अब भी बंद.

ईरान का कच्चा तेल और कंडेनसेट का निर्यात अगस्त के महीने में लगभग 40 प्रतिशत तक गिर गया है, जो पिछले कई सालों में सबसे कम स्तर पर पहुंच गया है। अमेरिका द्वारा लगातार बढ़ाए जा रहे नौसैनिक दबाव और नाकेबंदी के कारण यह स्थिति पैदा हुई है। 10 अगस्त 2026 के सैटेलाइट डेटा से यह साफ पता चलता है कि ईरान के मुख्य निर्यात टर्मिनल यानी खार्ग द्वीप पर तेल लोड करने का काम लगभग पूरी तरह से बंद हो गया है। अमेरिका ने पिछले महीने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ईरान द्वारा टैंकर्स पर किए गए हमलों के बाद, 21 अगस्त तक ईरान को तेल बेचने की अनुमति देने वाला लाइसेंस रद्द कर दिया था, जिसके बाद निर्यात में यह भारी कमी आई है।
अमेरिका और ईरान के बीच बयानबाजी और शर्तें
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने 10 अगस्त को यह बयान दिया था कि अमेरिका ईरान के साथ आंशिक रूप से बातचीत कर रहा है और साथ ही आर्थिक दबाव भी बढ़ा रहा है, और उन्होंने यह भी कहा कि ईरान की स्थिति इस समय बहुत खराब है। इसके जवाब में, ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव Mohammad Bagher Zolghadr ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा खोलने के लिए कई शर्तें सामने रखी हैं। इन शर्तों में नौसैनिक नाकेबंदी और प्रतिबंधों को हटाना, ईरान के आसपास से अमेरिकी सेना को वापस बुलाना, युद्ध का मुआवजा देना और ईरान की फ्रीज की गई संपत्तियों को रिहा करना शामिल है। इसके अलावा, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के एक प्रवक्ता ने यह जोड़ा कि रास्ते का खुलना अभी तुरंत संभव नहीं है और यह इस बात पर निर्भर करता है कि अमेरिका पूरी तरह से ईरान की शर्तें मान ले।
कमर्शियल शिपिंग पर असर और क्षेत्रीय तनाव
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज आम कमर्शियल जहाजों के लिए अभी भी ज्यादातर बंद है और लगातार हो रहे हमलों, ईरान की धमकियों और बहुत ज्यादा युद्ध-जोखिम बीमा की वजह से यहाँ जहाजों की आवाजाही बहुत कम हो गई है। संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE ने 10 अगस्त को स्ट्रेट में अपनी सरकारी तेल कंपनी से जुड़े एक कैरियर पर हुए ईरानी हमले की कड़ी निंदा की है। वहीं दूसरी ओर, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmail Baghaei ने पिछले महीने एक ईरानी जहाज पर कथित हमले के लिए यूक्रेन से मुआवजे की मांग की है। ईरान के साथ चल रहे इस तनाव के कारण पेंटागन को मध्य पूर्व में बहुत तेजी से जहाज, विमान और एयर-डिफ़ेंस यूनिट भेजने पड़े हैं, जिससे अमेरिका के पास मौजूद हथियार और भंडार कम हो रहे हैं और वहां की सैन्य तथा खुफिया कम्युनिटी में चिंता बढ़ गई है।