Oman और Iran के बीच होने वाला है नया शिपिंग समझौता, Strait of Hormuz से तेल व्यापार को मिल सकती है राहत.

फारस की खाड़ी में पिछले कुछ महीनों से चल रहे तनाव के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है। Iran और Oman जल्द ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज यानी Strait of Hormuz से गुजरने वाले जहाजों के लिए एक अस्थायी शिपिंग समझौते को अंतिम रूप देने जा रहे हैं। इस बात की जानकारी ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने 8 अगस्त 2026 को दी है। इस समझौते के तहत एक नया ट्रैफिक रूट तय किया जाएगा जिससे दोनों देशों के बीच समुद्री रास्तों को कानूनी और तकनीकी रूप से ठीक करने में मदद मिलेगी।
पुराने नियमों को बदला गया
ईरान के विदेश मंत्री ने साफ किया कि पुराना ट्रैफिक सेपरेशन नियम अब पूरी तरह से खत्म कर दिया गया है और वह स्वीकार्य नहीं है। इस समझौते का मुख्य उद्देश्य आने वाले समय में एक स्थाई समाधान निकालना है ताकि इस जलमार्ग से जुड़ी सभी कानूनी अड़चनों को दूर किया जा सके। बातचीत का मुख्य फोकस नए कानूनी नियमों को सेट करना और जहाजों के आने-जाने की व्यवस्था को सही तरीके से चलाना है ताकि व्यापार में कोई रुकावट न आए।
अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा है विवाद
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पिछले पांच महीनों से अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे विवाद की वजह से इस रास्ते से होने वाला तेल का निर्यात बुरी तरह प्रभावित हुआ है। अमेरिकी अधिकारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि इस समझौते के बाद सामान्य तेल यातायात फिर से शुरू हो सकता है। अमेरिका ने यह भी कहा है कि जब कमर्शियल शिपिंग बिना किसी रुकावट के बहाल हो जाएगी तो अमेरिकी प्रशासन ईरानी बंदरगाहों से अपना नाकाबंदी हटा लेगा।
ईरान की शर्तें और सुरक्षा के कड़े इंतजाम
ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल Hossein Mohebbi ने कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का पूरी तरह से खुलना केवल ईरान और ओमान की बातचीत पर निर्भर नहीं करता है। इसके लिए अमेरिका को ईरान की सभी शर्तों को मानना होगा और क्षेत्रीय मामलों में दखलअंदाजी बंद करनी होगी। ईरान जून महीने में साइन हुए 'इस्लामाबाद समझौता' के कथित उल्लंघन के लिए अमेरिका से मुआवजे की भी मांग कर रहा है। हाल ही में यूएई की सरकारी तेल कंपनी के जहाज पर एक मिसाइल हमले की खबर भी सामने आई थी हालांकि उस पर ईरान की तरफ से कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं आई है। ईरान के राष्ट्रपति Masazd Pezeshkian ने यह भी दोहराया है कि उनका देश बातचीत के लिए हमेशा तैयार है लेकिन किसी भी तरह के दबाव या जोर-जबरदस्ती को कभी स्वीकार नहीं करेगा।