Oman के साथ बातचीत में ईरान निकालने की कोशिश में है बीच का रास्ता, होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर फंसा है पेच.

Sushma Kumari12 August 20263 min read93 viewsOman
Oman के साथ बातचीत में ईरान निकालने की कोशिश में है बीच का रास्ता, होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर फंसा है पेच.

अमेरिका के साथ पिछले कुछ समय से चल रहे तनाव के बीच ईरान ने इस साल फरवरी से होर्मुज जलडमरूमध्य पर छिड़ी जंग के हालात को देखते हुए बीच का रास्ता निकालने की कवायद शुरू कर दी है। इस पूरे मामले को लेकर ओमान की मध्यस्थता से बातचीत चल रही है, जिससे दोनों पक्षों के बीच कुछ सकारात्मक परिणाम सामने आने की उम्मीद जताई जा रही है। अल जजीरा, फॉक्स न्यूज और सीबीएस न्यूज की रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने उम्मीद जताई है कि ओमान के साथ हो रही इस अहम बातचीत से होर्मुज जलडमरूमध्य में जारी गतिरोध का कोई रास्ता निकलेगा। उन्होंने बातचीत के दौरान साफ तौर पर कहा कि इस समय न तो युद्ध और न ही शांति की स्थिति से आगे बढ़ने की जरूरत है, ताकि क्षेत्र में शांति और सामान्य स्थिति बहाल की जा सके।

ओमान के साथ बातचीत और ईरान की शर्तें

ईरान के विदेशमंत्री अब्बास अरागची ने हाल ही में पत्रकारों से बातचीत करते हुए बताया कि ओमान के साथ हो रही चर्चा के दौरान होर्मुज में एक अस्थायी रास्ता बनाने पर सहमति लगभग तय हो गई है। हालांकि, जलडमरूमध्य को पूरी तरह से फिर से खोलने के लिए ईरान की तरफ से कुछ कड़ी शर्तें रखी गई हैं, जिन्हें पूरा करना जरूरी बताया गया है। ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की तरफ से स्पष्ट किया गया है कि अमेरिका सबसे पहले ईरान को धमकाना पूरी तरह बंद करे और देश के साथ-साथ क्षेत्रीय सहयोगियों के खिलाफ किसी भी तरह की सैन्य कार्रवाई को तुरंत रोके। इसके अलावा, अमेरिका को अपनी नौसैनिक नाकाबंदी हटानी होगी और संघर्ष की वजह से हुए नुकसान के लिए ईरान को उचित मुआवजा देना होगा। साथ ही, ईरान पर लगाए गए प्रतिबंधों को हटाने के साथ उसकी फ्रीज की गई संपत्ति को भी तुरंत बहाल करने की मांग की गई है।

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इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स और अमेरिकी प्रतिक्रिया

दूसरी तरफ, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी आईआरजीसी ने जलमार्ग को दोबारा खोलने के लिए अपनी पुरानी और सख्त शर्त को एक बार फिर दोहराया है। उनका कहना है कि यह व्यस्त जलमार्ग तभी खोला जा सकता है जब अमेरिका की तरफ से लगाई गई नौसैनिक नाकाबंदी को समाप्त किया जाए और युद्ध में हुए नुकसान का पूरा मुआवजा दिया जाए। वहीं, अमेरिका की तरफ से भी इस मामले पर कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने खुला आरोप लगाते हुए कहा है कि ईरान संबंधों में सुधार करने के लिए अभी भी पूरी तरह तैयार नहीं है, इसलिए वाशिंगटन उस पर अपना दबाव लगातार जारी रखेगा। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि उन्होंने ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम को पहले ही खत्म कर दिया है और उसकी पारंपरिक तथा गैरपारंपरिक सैन्य क्षमताओं को भी काफी हद तक कम कर दिया है, इसलिए अगर ईरान अब भी किसी समझौते को नहीं मानता है तो यह उनका अपना फैसला होगा।

होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही पर असर

ओमान में चल रही इस उच्चस्तरीय वार्ता के दौरान, ओमान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में मालवाहक जहाजों पर लगातार हो रहे हमलों की कड़ी निंदा की है, हालांकि ओमान ने इस संबंध में सीधे तौर पर किसी भी देश पर कोई दोष नहीं मढ़ा है। अमेरिकी सेना की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, होर्मुज क्षेत्र में अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी के कारण अब तक कुल 53 जहाजों को अपना रास्ता बदलने के लिए मजबूर होना पड़ा है। अमेरिकी मध्य कमान ने यह भी साफ किया कि इस पूरी कार्रवाई के दौरान मानवीय सहायता लेकर जा रहे 30 से ज्यादा जहाजों को पूरी तरह सुरक्षित तरीके से गुजरने की अनुमति दी गई थी, ताकि आम लोगों तक जरूरी राहत सामग्री पहुंचने में कोई रुकावट न आए। क्षेत्र में इस तरह के तनाव से खाड़ी देशों में आने-जाने वाले प्रवासियों और व्यापारिक गतिविधियों पर भी सीधा असर पड़ रहा है, जिसे लेकर वैश्विक स्तर पर चिंता बनी हुई है।

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