Strait of Hormuz: ईरान और ओमान के बीच हॉर्मज जलडमरूमध्य की सुरक्षा को लेकर चल रही है बातचीत, ओमान की राजधानी में हो रहा है फैसला।

तेहरान और ओमान के बीच इन दिनों एक महत्वपूर्ण रणनीतिक मुद्दे पर लगातार बातचीत का दौर जारी है। Iranian Foreign Ministry के प्रवक्ता Esmaeil Baqaei ने सोमवार, 10 अगस्त 2026 को यह जानकारी दी कि दोनों देशों के बीच सुरक्षित नौवहन मार्ग को स्थापित करने को लेकर चर्चा बहुत ही सकारात्मक और सही दिशा में आगे बढ़ रही है। इस पूरी प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए इस बेहद अहम जलमार्ग को पूरी तरह से सुरक्षित बनाना है ताकि किसी भी तरह की अनहोनी से बचा जा सके और व्यापारिक गतिविधियां बिना किसी रुकावट के चलती रहें।
शिपिंग ट्रैफिक मैप पर बनी सहमति
प्रवक्ता ने यह भी बताया कि दोनों पक्षों के बीच एक खास शिपिंग ट्रैफिक मैप को लेकर पूरी सहमति बन चुकी है। अब केवल इस योजना के कुछ तकनीकी पहलुओं को अंतिम रूप देना बाकी है जिसके लिए लगातार बैठकें की जा रही हैं। इस संयुक्त बयान के जरिए समुद्री यातायात को सुरक्षित रखने, पर्यावरण को बचाने और किसी भी तरह के समुद्री अपराधों से निपटने के लिए कड़े नियम बनाए जाएंगे। इसके अलावा जहाजों को मिलने वाली समुद्री सेवाओं के बदले तय शुल्क और लागत पर भी विचार किया जा रहा है। इस पूरी कसरत का एकमात्र लक्ष्य इस रणनीतिक रास्ते पर पूर्ण सुरक्षा की गारंटी देना है।
ईरान की कड़ी शर्तें और अमेरिका पर दबाव
एक तरफ जहां ओमान के साथ बातचीत जारी है वहीं ईरान का यह साफ कहना है कि जब तक अमेरिका उसकी सभी शर्तें नहीं मान लेता तब तक हॉर्मज जलमार्ग को पूरी तरह से नहीं खोला जाएगा। ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने अमेरिका के सामने कई बड़ी शर्तें रखी हैं जिनमें ईरानी बंदरगाहों की नौका नाकाबंदी को तुरंत खत्म करना, तेहरान के खिलाफ धमकियां बंद करना, क्षेत्र से सभी सैन्य संपत्तियों को हटाना, प्रतिबंधों को पूरी तरह से हटाना, फ्रीज की गई संपत्तियों को वापस करना और युद्ध से हुए नुकसान की भरपाई करना शामिल है। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के प्रवक्ता Hossein Mohebi ने दो टूक शब्दों में कहा कि देश की मौजूदा रणनीति तब तक इस जलडमरूमध्य को अपने नियंत्रण में रखने की है जब तक दुश्मन हमारी सभी शर्तें स्वीकार नहीं कर लेता। उन्होंने यह भी कहा कि अब यह रास्ता केवल एक पानी का मार्ग नहीं बल्कि उनके लिए युद्ध का मैदान बन चुका है।
इजरायली जहाजों के प्रवेश पर लगा प्रतिबंध
इस बीच देश के विदेश मंत्री Seyed Abbas Araghchi ने एक बार फिर से यह स्पष्ट कर दिया है कि इजरायल से जुड़े किसी भी जहाज को इस रास्ते से गुजरने की बिल्कुल अनुमति नहीं दी जाएगी। दूसरी तरफ ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति समिति ने भी इस जलमार्ग की सुरक्षा और सतत प्रगति के लिए एक नई कार्ययोजना के सामान्य प्रारूप को मंजूरी दे दी है। समिति के प्रवक्ता Hassan Qashqavi ने बताया कि संबंधित विभागों के प्रस्तावों की समीक्षा करने के बाद इस कार्ययोजना को सभी सदस्यों की सहमति से पास कर दिया गया है जिससे यह साफ होता है कि इस संवेदनशील मामले पर पूरा देश एक ही रुख अपना रहा है।