Strait of Hormuz को लेकर ईरान का बड़ा कदम, ओमान और अमेरिका के साथ समझौते का इंतज़ार

Aanya7 August 20262 min read54 viewsOman
Strait of Hormuz को लेकर ईरान का बड़ा कदम, ओमान और अमेरिका के साथ समझौते का इंतज़ार

होरमुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जहाँ ईरान एक नए समझौते के लिए अपने सर्वोच्च नेता Ayatollah Mojtaba Khamenei और Supreme National Security Council (SNSC) की मंजूरी का बेसब्री से इंतज़ार कर रहा है। 7 अगस्त 2026 को सामने आई रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह प्रस्तावित समझौता ओमान और अमेरिका के साथ समुद्री रास्ते के इस्तेमाल को लेकर है। हालांकि ईरान के सर्वोच्च नेता के स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के कारण उनसे संपर्क करना अभी मुश्किल बताया जा रहा है, फिर भी बातचीत में प्रगति की खबरें सामने आ रही हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने भी इन चर्चाओं में हो रही प्रगति को स्वीकार किया है।

समझौते की मुख्य शर्तें और ईरान की मांग

ईरान के सरकारी मीडिया ने जानकारी दी है कि इस समझौते के तहत ओमान के साथ मिलकर ईरान उन अमेरिकी और इसराइली जहाजों को Strait of Hormuz से गुजरने से रोक सकता है जो उसके दायरे में आते हैं। नियमों को तोड़ने वाले जहाजों पर उनके कुल cargo value का 20% तक जुर्माना लगाया जा सकता है। इसके अलावा, जिन देशों या व्यक्तियों ने ईरान को नुकसान पहुँचाया है, उन्हें तब तक इस रास्ते का उपयोग करने की अनुमति नहीं मिलेगी जब तक वे मुआवजा नहीं भर देते।

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ईरान ने यह भी स्पष्ट किया है कि वह जलडमरूमध्य के भीतर जहाजों के नेविगेशन, ट्रैफिक मॉनिटरिंग और सुरक्षा की जिम्मेदारी खुद उठाएगा। हालांकि, इस व्यस्त समुद्री मार्ग का पूर्ण रूप से खुलना इस बात पर निर्भर करेगा कि वाशिंगटन ईरानी बंदरगाहों पर लगी नाकेबंदी को हटा ले। ईरानी विदेश मंत्रालय के उप-मंत्री Kazem Gharibabadi ने 6 अगस्त 2026 को कहा था कि अमेरिका अपनी जिम्मेदारियों पर लौटने के लिए तैयार है।

तनाव और सुरक्षा की स्थिति

दूसरी तरफ, अमेरिका का रुख साफ है कि Strait of Hormuz एक अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग है और किसी एक देश का इस पर अधिकार नहीं है। ओमान की तरफ से अभी तक इस समझौते पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। विवादों को लेकर भी अलग-अलग खबरें हैं, जहाँ कुछ रिपोर्ट कहती हैं कि ईरान कार्गो का 5 से 7% शुल्क मांग रहा है, वहीं दूसरी तरफ यह भी चर्चा है कि एक अस्थायी समझौते में सभी शुल्कों को माफ किया जा सकता है।

क्षेत्रीय तनाव का असर लगातार बना हुआ है। बीते 6 अगस्त 2026 को दक्षिणी लेबनान में हुए एक विस्फोट में इसराइली सैनिकों की मौत हुई थी, जबकि 5 अगस्त 2026 को होरमुज के पास दो धमाकों की आवाज सुनी गई थी। खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों और भारत से आने-जाने वाले लोगों के लिए यह स्थिति चिंता का विषय हो सकती है, क्योंकि किसी भी बड़े समुद्री तनाव का सीधा असर तेल की कीमतों और वैश्विक शिपिंग पर पड़ता है। अधिक जानकारी के लिए Axios की रिपोर्ट देखी जा सकती है।

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