ईरान और पाकिस्तान के बीच बड़ा व्यापारिक समझौता, 10 अरब डॉलर के लक्ष्य को पूरा करने के लिए बनी नई रणनीति

पाकिस्तान और ईरान ने अपने द्विपक्षीय व्यापार को एक नई ऊंचाई पर ले जाने का फैसला किया है। 5 अगस्त 2026 को इस्लामाबाद में आयोजित 10वीं पाकिस्तान-ईरान ज्वाइंट ट्रेड कमेटी (JTC) की बैठक के बाद दोनों देशों ने घोषणा की कि वे 10 अरब डॉलर के सालाना व्यापारिक लक्ष्य को हासिल करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। इस बैठक में व्यापारिक बाधाओं को दूर करने और मुक्त व्यापार समझौते यानी फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) की प्रक्रिया को तेज करने पर विशेष जोर दिया गया है।
व्यापारिक लक्ष्य और नई उम्मीदें
यह महत्वाकांक्षी 10 अरब डॉलर का लक्ष्य साल 2024 के अप्रैल महीने में तय किया गया था, जब ईरान के दिवंगत राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी ने पाकिस्तान का दौरा किया था। उस समय दोनों देशों ने अगले पांच वर्षों के भीतर इस आंकड़े तक पहुंचने का सपना देखा था। ईरान के उद्योग, खान और व्यापार मंत्री डॉ. मोहम्मद अताबक ने इस बैठक के दौरान भरोसा जताया कि दोनों देशों के बीच चल रही FTA की बातचीत बहुत जल्द सकारात्मक मोड़ पर खत्म होगी, जिससे दोनों देशों के व्यापारियों को बड़ी राहत मिलेगी।
व्यापार की राह में आने वाली मुश्किलें होंगी दूर
बैठक में मौजूद अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि अब समय आ गया है कि व्यापार के रास्ते में आने वाली पुरानी अड़चनों को खत्म किया जाए। इसमें मुख्य रूप से बॉर्डर पर होने वाली लॉजिस्टिक दिक्कतें, कस्टम की जटिल प्रक्रियाएं और सामान को इधर-उधर ले जाने में होने वाली देरी शामिल हैं। इन समस्याओं को सुलझाने से दोनों पड़ोसी मुल्कों के बीच व्यापारिक गतिविधियां और भी तेज होंगी।
आर्थिक सहयोग के नए रास्ते
दोनों देशों की सरकारों ने निवेश बढ़ाने, नई साझेदारियां करने और बिजनेसमैन के बीच सीधे संपर्क यानी B2B कांटेक्ट को मजबूत करने का मन बनाया है। पाकिस्तान के वाणिज्य मंत्री जाम कमाल खान ने कहा कि सरकार की जिम्मेदारी है कि वे अपने निजी सेक्टर के कारोबारियों को एक ऐसा माहौल दें जहां वे बिना किसी डर या दुविधा के अपना काम कर सकें। इस दिशा में बॉर्डर पर नए बाजारों को खोलना और सामान के बदले सामान यानी बार्टर ट्रेड को बढ़ावा देना बेहद कारगर साबित होगा।
ईरान की पाकिस्तान के पोर्ट्स पर नजर
ईरान ने स्पष्ट रूप से अपनी रुचि दिखाई है कि वह पाकिस्तान के कराची और ग्वादर बंदरगाहों का उपयोग करके अपने आर्थिक संबंधों को और विस्तार देना चाहता है। इन बंदरगाहों के माध्यम से व्यापारिक सामान की आवाजाही आसान होगी, जिससे दोनों देशों के आर्थिक विकास को गति मिलेगी। इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य व्यापार को अधिक संरचनाबद्ध, predictable और सुलभ बनाना है, ताकि छोटे और बड़े सभी प्रकार के व्यापारी इसका सीधा लाभ उठा सकें।