अमेरिका के साथ बातचीत पर बोले ईरानी राष्ट्रपति, हमेशा युद्ध में नहीं रह सकता देश.

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने अमेरिका के साथ जारी तनाव के बीच एक बड़ा बयान देते हुए कहा है कि देश हमेशा युद्ध की स्थिति में नहीं रह सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अंततः देश को युद्ध तथा शांति के बीच की इस अनिश्चित स्थिति से पूरी तरह बाहर निकालने के लिए कोई ठोस फैसला करना ही होगा। इस बयान से साफ होता है कि ईरान अब कूटनीतिक रास्तों पर भी विचार कर रहा है ताकि देश की जनता को राहत मिल सके।
समझौता ज्ञापन का किया बचाव
रविवार को तेहरान में आयोजित दो अलग-अलग कार्यक्रमों के दौरान राष्ट्रपति पेजेशकियन ने इस साल जून में अमेरिका के साथ हुए समझौता ज्ञापन यानी एमओयू का खुलकर बचाव किया। उन्होंने कहा कि वार्ता प्रक्रिया से सीधे तौर पर जुड़े लोगों का ऐसा मानना था कि यह समझौता देश के सामने मौजूदा समय में मौजूद गंभीर संकट से निकलने का सबसे बेहतर और कारगर रास्ता था। ईरानी राष्ट्रपति ने यह भी बताया कि इस समझौते को सही तरीके से लागू करके तर्कसंगत और सम्मानजनक तरीके से समस्याओं का समाधान निकाला जा सकता था। हालांकि, राजनीतिक परिस्थितियों के कारण पिछले महीने यह समझौता टूट गया था, जिसके बाद से देश के भीतर अमेरिका के साथ बातचीत और भविष्य की रणनीति को लेकर नेतृत्व में मतभेद उभरने की चर्चाएं काफी तेज हो गई हैं।
आर्थिक और सामाजिक चुनौतियों पर जोर
अपने संबोधन के दौरान राष्ट्रपति पेजेशकियन ने देश के सामने खड़ी गंभीर आर्थिक और सामाजिक चुनौतियों का भी विशेष रूप से जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सरकार देश में बढ़ती महंगाई, आम लोगों की आजीविका, रोजगार के नए अवसर और भविष्य से जुड़ी तमाम समस्याओं को दूर करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उनका यह भी कहना था कि केवल सैन्य ताकत ही किसी भी देश की सफलता की पूरी गारंटी नहीं हो सकती है, इसलिए सरकार के लिए जनता का अटूट भरोसा बनाए रखना बेहद जरूरी है। इस कार्यक्रम में इस्लामिक रिपब्लिक के संस्थापक रुहोल्लाह खुमैनी के पोते अयातुल्ला सैय्यद हसन खुमैनी भी विशेष रूप से मौजूद रहे। उन्होंने इस मौके पर अपने विचार रखते हुए कहा कि कई बार एक बुद्धिमान समझौता सैकड़ों युद्धों से कहीं अधिक प्रभावी और लाभकारी साबित हो सकता है।