Iran President: ईरान के राष्ट्रपति ने जंग खत्म करने की कही बात, कहा- दुनिया मानती है हमारी जीत.

ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने 21 अगस्त 2026 को एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि ईरान को अपनी मजबूत स्थिति से अब इस चल रही जंग को खत्म करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। उनका यह भी कहना था कि आज पूरी दुनिया यह जानती है और मानती है कि इस युद्ध में ईरान की जीत हुई है। राष्ट्रपति ने अमरीका पर अंतरराष्ट्रीय नियमों को तोड़ने का आरोप लगाया है क्योंकि अमरीकी हमलों में ईरान के अस्पतालों और स्कूलों जैसे जरूरी ठिकानों को निशाना बनाया गया था।
14 सूत्रीय समझौते का बचाव और कूटनीतिक प्रयास
राष्ट्रपति ने 18 जून 2026 को साइन किए गए 14-पॉइंट एमओयू (समझौता ज्ञापन) को देश के लिए एक बहुत बड़ी उपलब्धि बताया। इस दस्तावेज को ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने मंजूरी दी थी। इस समझौते को कराने में पाकिस्तान और कतर ने मध्यस्थता की भूमिका निभाई थी। इसके अलावा ओमान भी इस समय होर्मुज जलडमरूमध्य यानी Strait of Hormuz से जहाजों की आवाजाही को लेकर बातचीत में लगातार जुटा हुआ है। राष्ट्रपति ने साफ किया कि इस समझौते में सरेंडर करने जैसी कोई भी शर्त नहीं है और सारी जिम्मेदारियां दूसरी तरफ के लोगों पर डाली गई हैं।
60 दिन की बातचीत की समयसीमा समाप्त
जून के समझौते के तहत जो 60 दिन की बातचीत का समय तय किया गया था, वह 20 अगस्त 2026 को खत्म हो गया है। इसकी वजह से अब आगे होने वाली कूटनीतिक बैठकों को लेकर असमंजस की स्थिति बन गई है। देश के अंदर ईरान का सबसे शक्तिशाली सैन्य संगठन, पैरामिलिट्री रिवोल्यूशनरी गार्ड, और अधिक रियायतें देने की मांग कर रहा है। वे युद्ध के लिए वित्तीय मुआवजा यानी पैसा और होर्मुज जलडमरूमध्य पर पूरा ईरान का कंट्रोल चाहते हैं।
आर्थिक दबाव और कड़े प्रतिबंध
इस समय ईरान की जनता और सरकार इस जंग तथा अमरीकी नेवल नाकाबंदी की वजह से बहुत ज्यादा आर्थिक तंगी का सामना कर रही है। इन सब चीजों की वजह से सरकार का खर्च बहुत बढ़ गया है और आम लोगों का जीवन भी काफी प्रभावित हुआ है। इस बीच, संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE ने तेहरान के साथ व्यापार पूरी तरह से सस्पेंड कर दिया है। साथ ही, अमरीकी राष्ट्रपति Donald Trump ने भी ईरान पर और अधिक भारी आर्थिक प्रतिबंध लगाने की चेतावनी दी है। राष्ट्रपति Pezeshkian ने पहले ही साफ कर दिया था कि उनकी मुख्य मांगे युद्ध को खत्म करना, नेवल नाकाबंदी को हटाना, रोके गए पैसों को वापस पाना और उसके बाद परमाणु मामलों पर बातचीत शुरू करना है। इन सभी मुश्किलों के बावजूद उनका कहना है कि ईरान की सेना देश की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है और वह किसी भी अंतरराष्ट्रीय दबाव के आगे नहीं झुकेगी।