Iran पर क्षेत्रीय तनाव के बीच राष्ट्रपति पेजेश्कियन का बड़ा बयान, कहा- हमने समझौते के नियमों से नहीं किया समझौता.

क्षेत्रीय तनाव और अमेरिका के साथ चल रहे गतिरोध के बीच ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने एक कार्यक्रम के दौरान बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान ने जून के महीने में हुए समझौते के किसी भी नियम या खंड से कोई समझौता नहीं किया है। राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि उनका देश पूरी ताकत और गरिमा के साथ आगे बढ़ रहा है और अमेरिका के साथ चल रहे पुराने विवाद को अब खत्म होना चाहिए।
समझौते की स्थिति और कड़े नियम
इसी साल जून में पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता से एक समझौता हुआ था, जिसके बाद अप्रैल से जारी संघर्ष पर विराम लगा था। इस डील के तहत अंतिम समझौते के लिए 60-day negotiation window खोली गई थी। ईरान के सर्वोच्च नेता Mojtaba Khamenei ने इस डील को मंजूरी दी थी, लेकिन देश के कई सांसदों ने इस पर सवाल उठाए थे। खासकर स्ट्रेट ऑफ होरमुज से जुड़े मामलों को लेकर संसद के भीतर काफी विरोध देखने को मिला था। यह बातचीत का समय सीमा लगभग 18 अगस्त 2026 को खत्म हो गई, लेकिन समुद्री रास्तों और नियमों को लेकर असहमति के कारण कोई अंतिम फैसला नहीं हो पाया।
स्ट्रेट ऑफ होरमुज और खाड़ी देशों को चेतावनी
वर्तमान स्थिति यह है कि Strait of Hormuz का रास्ता अभी भी आंशिक रूप से बंद है और अमेरिकी नौसेना ने वहां घेराबंदी कर रखी है। सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी के सचिव Mohsen Rezaei ने 22 अगस्त 2026 को साफ शब्दों में कहा कि जब तक अमेरिका अपने बर्ताव में बदलाव नहीं लाता और अपनी जिम्मेदारियां पूरी नहीं करता, तब तक यह जलमार्ग बंद ही रहेगा। उन्होंने खाड़ी देशों को भी चेतावनी दी कि यदि उन्होंने अमेरिका का आर्थिक समर्थन किया, तो उनके हितों को निशाना बनाया जा सकता है और क्षेत्रीय तेल निर्यात रोका जा सकता है। हालांकि, ईरान ने इराक के टैंकरों को जाने की छूट दी है क्योंकि इराक को एक मित्र देश माना गया है।
कूटनीतिक प्रयास और सैन्य चेतावनियां
एक तरफ तनाव बना हुआ है तो दूसरी तरफ बातचीत के रास्ते भी तलाशे जा रहे हैं। मिस्र और ईरान के विदेश मंत्रियों ने 22 अगस्त को क्षेत्रीय शांति को लेकर चर्चा की। वहीं दूसरी तरफ, ईरानी सशस्त्र बलों के चीफ ऑफ स्टाफ मेजर जनरल Ali Abdollahi ने किसी भी सैन्य खतरे का कड़ा और बड़ा जवाब देने की चेतावनी दी है। इसके अलावा, ईरान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिका द्वारा लगाए जाने वाले नए प्रतिबंधों को आर्थिक आतंकवाद करार दिया है। इस मामले में चीन के विदेश मंत्रालय ने भी ईरान का समर्थन किया और कहा कि दबाव बनाने से समस्याओं का समाधान नहीं निकाला जा सकता है।