गाजा समझौते पर ईरान का बड़ा ऐलान, हमास के हर फैसले का समर्थन करेगा तेहरान

Aanya5 August 20262 min read129 viewsWorld
गाजा समझौते पर ईरान का बड़ा ऐलान, हमास के हर फैसले का समर्थन करेगा तेहरान

ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने बुधवार, 5 अगस्त 2026 को एक बड़ा बयान जारी करते हुए साफ कर दिया है कि तेहरान गाजा में चल रही अप्रत्यक्ष बातचीत में हमास के रुख का पूरी तरह समर्थन करेगा। उन्होंने हमास के नेता Khalil al-Hayya के साथ फोन पर हुई बातचीत के दौरान यह आश्वासन दिया कि फिलिस्तीनी नेतृत्व जो भी फैसला लेगा, ईरान उसके साथ खड़ा रहेगा। यह बयान उस समय आया है जब क्षेत्र में तनाव चरम पर है और दुनिया भर की निगाहें गाजा में शांति की कोशिशों पर टिकी हैं।

शांति वार्ता और हमास की मुख्य मांगें

हमास के नेता Khalil al-Hayya ने राष्ट्रपति के साथ बातचीत में स्पष्ट किया कि उनकी स्थिति पहले की तरह ही अटल है। हमास का कहना है कि जब तक इजरायली सेना गाजा पट्टी से पूरी तरह बाहर नहीं निकल जाती, तब तक कोई भी निशस्त्रीकरण प्रक्रिया शुरू नहीं की जाएगी। हमास इस बात पर जोर दे रहा है कि अगर निशस्त्रीकरण की कोई बात होती भी है, तो इसकी देखरेख एक फिलिस्तीनी राष्ट्रीय समिति द्वारा की जानी चाहिए, न कि इजरायल के हाथों में होनी चाहिए। हमास ने अमेरिका के Board of Peace द्वारा पेश किए गए हालिया प्रस्तावों पर अपनी नाराजगी भी जताई है।

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इजरायल और अमेरिका का रुख

दूसरी ओर, इजरायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने मंगलवार, 4 अगस्त 2026 को यह साफ कर दिया कि इजरायल तब तक पीछे नहीं हटेगा जब तक हमास का पूरी तरह निशस्त्रीकरण नहीं हो जाता। उन्होंने यह भी बताया कि इजरायल अभी अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump द्वारा पेश किए गए नए प्रस्ताव की बारीकी से जांच कर रहा है। पिछले हफ्ते, राष्ट्रपति ट्रंप ने गाजा में हमास और अन्य सशस्त्र समूहों के पूर्ण निशस्त्रीकरण के लिए एक ऐतिहासिक समझौते की घोषणा की थी, जिसमें कतर, मिस्र और तुर्की जैसे मध्यस्थ देश भी शामिल थे।

ईरान के इस कदम से कूटनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान के Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) ने पहले भी हमास को अमेरिका द्वारा प्रस्तावित निशस्त्रीकरण समझौते पर हस्ताक्षर करने से मना किया था और मामले में देरी करने की सलाह दी थी। वहीं, कतर का कहना है कि गाजा शांति योजना को लागू करने में देरी के पीछे मुख्य रूप से इजरायल का अड़ियल रवैया जिम्मेदार है। अब देखना यह होगा कि ईरान का यह सीधा समर्थन भविष्य की बातचीत को किस दिशा में ले जाता है।

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