BRICS मीटिंग में ईरान का बड़ा प्रस्ताव, पेमेंट सिस्टम को जोड़ने और बाहरी निर्भरता कम करने पर जोर.

भारत में आयोजित हुई BRICS वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक गवर्नर्स की बैठक में ईरान ने एक बड़ा कदम उठाया है। ईरान ने सभी सदस्य देशों के बीच एक स्वतंत्र वित्तीय गलियारा बनाने और राष्ट्रीय भुगतान नेटवर्क को आपस में जोड़ने का औपचारिक प्रस्ताव रखा है। इस बैठक के दौरान ईरान के केंद्रीय बैंक के गवर्नर Abdolnaser Hemmati ने सभी देशों से अपील की कि अब केवल कागजी बैठकों से आगे बढ़कर काम करना होगा। उन्होंने कहा कि हमें मिलकर एक ऐसा मजबूत और सुरक्षित ढांचा तैयार करना चाहिए जिससे सीमा पार पैसों के लेन-देन में कोई परेशानी न आए।
राष्ट्रीय मुद्राओं के इस्तेमाल से घटेगा खर्च
गवर्नर Abdolnaser Hemmati ने अपनी बात रखते हुए यह भी बताया कि अगर सभी सदस्य देश अपने भुगतान सिस्टम को एक-दूसरे से जोड़ लेंगे और आपसी व्यापार में अपनी राष्ट्रीय मुद्राओं का इस्तेमाल करेंगे, तो इससे दूसरे देशों के वित्तीय तंत्र पर हमारी निर्भरता काफी हद तक कम हो जाएगी। ऐसा करने से पैसों के लेन-देन की प्रक्रिया बहुत तेज हो जाएगी और जो ऑपरेशनल खर्च आता है उसमें भी भारी कमी देखने को मिलेगी। ईरान का मानना है कि इस नई व्यवस्था से सभी भागीदार देशों की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और कारोबार करना आसान हो जाएगा।
ईरान ने शुरू की तकनीकी और कानूनी तैयारियां
इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाने के लिए ईरान ने अपनी तरफ से जमीनी काम भी शुरू कर दिया है। देश ने BRICS भुगतान प्रणालियों को आपस में जोड़ने के लिए तकनीकी, कानूनी और ऑपरेशनल आकलन करना शुरू कर दिया है। इसके साथ ही ईरान ने यह भी साफ कर दिया है कि वह इस पूरी योजना के लिए एक सही रोडमैप तैयार करने में पूरा सहयोग देने को तैयार है। इन सब कोशिशों के बीच ईरान BRICS के New Development Bank (NDB) की सदस्यता पाने के लिए भी लगातार प्रयास कर रहा है, ताकि देश में विकास से जुड़े प्रोजेक्ट्स के लिए आसानी से फंड मिल सके और आर्थिक सहयोग को और ज्यादा गहरा किया जा सके।
भारत का रुख और अन्य देशों की तैयारी
दूसरी तरफ, भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर Sanjay Malhotra ने इस बात की पुष्टि की है कि BRICS के तमाम सदस्य देश अपने यहाँ की तुरंत भुगतान प्रणालियों और सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी को आपस में जोड़ने के विकल्पों पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। इन सभी पहलों का मुख्य उद्देश्य सीमा पार होने वाले वित्तीय लेन-देन को और ज्यादा सरल और तेज बनाना है। इस पूरी व्यवस्था से आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय व्यापार करने का तरीका बदल जाएगा और सभी देशों को इसका सीधा फायदा मिलेगा।