ईरान ने फिर दोहराई ज़ायोनी कब्जे के खिलाफ नीति, राष्ट्रपति पेजेश्कियन बोले युद्ध किसी के हित में नहीं

Nura Basta24 August 20263 min read62 viewsWorld
ईरान ने फिर दोहराई ज़ायोनी कब्जे के खिलाफ नीति, राष्ट्रपति पेजेश्कियन बोले युद्ध किसी के हित में नहीं

इस्लामिक गणराज्य ईरान ने आधिकारिक तौर पर यह बात फिर से साफ कर दी है कि ज़ायोनी शासन के कब्जे के खिलाफ उनका विरोध एक बुनियादी और पक्की नीति है। इस बात पर जोर ऐसे समय में दिया गया है जब क्षेत्रीय स्तर पर कई कूटनीतिक गतिविधियां चल रही हैं और आर्थिक दबाव भी लगातार बढ़ता जा रहा है। इस संबंध में जानकारी 24 अगस्त 2026 को IRNA News Agency द्वारा दी गई रिपोर्ट में सामने आई है। ईरान के राष्ट्रपति

Masoud Pezeshkian

ने कहा है कि उनका देश तनाव को कम करने के लिए हर संभव समझदारी भरे और कूटनीतिक रास्ते अपनाने को तैयार है। उन्होंने यह भी साफ किया कि युद्ध किसी भी देश के हित में नहीं है। राष्ट्रपति ने इस बात पर जोर दिया कि इस विवाद को सुलझाने के लिए, जिसे उन्होंने ज़ायोनी शासन और अमेरिका की देन बताया, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भविष्य में होने वाले हमलों के खिलाफ गारंटी मिलनी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने ईरान के वैध अधिकारों को मान्यता देने और नुकसान की भरपाई करने की बात भी कही। उन्होंने यह भी बताया कि ये सभी कूटनीतिक प्रयास देश की राष्ट्रीय संप्रभुता को बचाने के लिए किए जा रहे हैं।

लेबनान की संप्रभुता का समर्थन और क्षेत्रीय स्थिति

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ईरान के विदेश मंत्री

Abbas Araghchi

ने लेबनान की संप्रभुता और उसकी क्षेत्रीय अखंडता का पूरा समर्थन करने की बात फिर से दोहराई। तेहरान में लेबनान के सांसद

Hassan Fadlallah

के साथ हुई एक बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने लेबनान, गाजा और वेस्ट बैंक में ज़ायोनी शासन की लगातार हो रही आक्रामकता की कड़ी निंदा की। लेबनान के सांसद ने ईरान की दमदार कूटनीति की तारीफ करते हुए सभी मुस्लिम देशों से मिलकर चलने और एक साझा रणनीति बनाने की अपील की। वहीं दूसरी तरफ, दुनिया का यह भू-राजनीतिक माहौल काफी तनावपूर्ण बना हुआ है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता

Esmaeil Baghaei

ने चेतावनी देते हुए कहा है कि जो देश अमेरिका के आर्थिक दबाव वाले अभियान में शामिल होंगे, उन्हें इसके बुरे परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

अमेरिका के आर्थिक प्रतिबंध और कूटनीतिक रास्ते

अमेरिका के ट्रेजरी सचिव

Scott Bessent

ने ईरान के तेल निर्यात, बैंकिंग सेक्टर और अंतरराष्ट्रीय भुगतान प्रणालियों को निशाना बनाते हुए एक बड़े वित्तीय हमले की घोषणा की है। इसके जवाब में ईरान ने साफ कर दिया है कि जब तक ये प्रतिबंध नहीं हटाए जाते, तब तक हॉर्मूज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही को सामान्य नहीं किया जाएगा। ईरान के भीतर राजनीतिक अस्तित्व और आर्थिक सुरक्षा को लेकर चल रही घरेलू चर्चाओं के बीच Donya-e Eqtesad के विशेषज्ञों का कहना है कि तेहरान बातचीत, सैन्य ताकत और आर्थिक प्रतिरोध की रणनीति का इस्तेमाल कर रहा है। विश्लेषक

Rahman Ghahremanpour

ने बताया कि ईरानी प्रशासन के भीतर अब किसी पुराने और औपचारिक समझौते पर वापस लौटने की इच्छा धीरे-धीरे बढ़ रही है। इसके अलावा, पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल

Asim Munir

भी क्षेत्रीय शांति और आपसी सहयोग के मामलों पर उच्च स्तरीय बातचीत के लिए तेहरान पहुंचने वाले हैं, क्योंकि पाकिस्तान लगातार ईरान और अमेरिका के बीच एक मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है।

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