फ्रांस और ईरान के बीच राजनयिक विवाद गहराया, दोनों देशों ने एक-दूसरे के राजनयिकों को किया निष्कासित.

तेहरान और पेरिस के बीच राजनयिक तनाव तब और बढ़ गया जब 23 अगस्त 2026 को ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmaeil Baqaei ने फ्रांस द्वारा दो ईरानी राजनयिकों को देश से बाहर निकाले जाने के फैसले को पूरी तरह खारिज कर दिया। उन्होंने इस कदम को पूरी तरह से अनुचित और दोनों देशों के आपसी संबंधों को नुकसान पहुंचाने वाला करार दिया। ईरानी पक्ष का कहना है कि उन्होंने पहले ही जवाबी कार्रवाई करते हुए दो फ्रांसीसी राजनयिकों को ईरान छोड़ने का आदेश दे दिया था और उनके दोबारा देश में प्रवेश पर भी रोक लगा दी थी, क्योंकि ईरानी सरकार के पास पुख्ता जानकारी थी कि फ्रांसीसी दूतावास अपने तय दायरे से बाहर जाकर काम कर रहा था।
विवाद की असली शुरुआत और जासूसी के आरोप
इस पूरे कूटनीतिक विवाद की शुरुआत 15 अगस्त 2026 को हुई थी, जब ईरान के खुफिया मंत्रालय ने दावा किया कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी एक जांच के दौरान उन्होंने दो फ्रांसीसी राजनयिकों को कुछ समय के लिए हिरासत में लिया था। ईरान का आरोप था कि ये लोग विदेशी दखलअंदाजी की गतिविधियों में शामिल थे। इसके बाद 19 अगस्त 2026 को ईरानी विदेश मंत्रालय ने आधिकारिक तौर पर इन दोनों अधिकारियों को अवांछित व्यक्ति यानी persona non grata घोषित कर दिया। ईरान का तर्क है कि इन राजनयिकों ने 1961 के राजनयिक संबंधों पर वियना कन्वेंशन के नियमों का उल्लंघन किया और देश के स्थानीय कानूनों को भी तोड़ा।
फ्रांस का कड़ा रुख और आरोपों से इनकार
ईरान की इस कार्रवाई के जवाब में फ्रांस के विदेश मंत्री Jean-Noel Barrot ने 18 अगस्त 2026 को यह घोषणा की थी कि फ्रांस भी दो ईरानी राजनयिकों को देश से बाहर का रास्ता दिखाएगा। फ्रांसीसी मंत्री ने 19 जुलाई 2026 की एक घटना का हवाला देते हुए इसे बेहद असहनीय और जानबूझकर किया गया हमला बताया। उनके मुताबिक इस घटना के दौरान फ्रांसीसी राजनयिकों को बिना किसी कसूर के हिरासत में लिया गया और उनके साथ बुरा बर्ताव किया गया, जो उनके राजनयिक प्रतिरक्षा का खुला उल्लंघन था। फ्रांस ने ईरान की तरफ से लगाए गए जासूसी और दखलअंदाजी के सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए उन्हें पूरी तरह झूठा बताया है। फ्रांस का साफ कहना है कि उनके राजनयिक केवल ईरान के वैज्ञानिकों और कलाकारों को वैध समर्थन देने का काम कर रहे थे।
मामले की गंभीरता को देखते हुए ईरानी प्रवक्ता Esmaeil Baqaei ने इस बात पर जोर दिया कि भविष्य में तेहरान और पेरिस के रिश्ते केवल आपसी सम्मान और एक-दूसरे के आंतरिक मामलों में दखल न देने की नीति पर ही टिक सकते हैं। फिलहाल दोनों देशों के बीच कूटनीतिक स्टाफ के कामकाज और अंतरराष्ट्रीय नियमों के पालन को लेकर आरोप-प्रप्रत्यरोप का दौर जारी है और स्थिति काफी तनावपूर्ण बनी हुई है।