Iran ने अमेरिका के Strait of Hormuz पर कंट्रोल के दावे को नकारा, कहा - यह सिर्फ फर्जी खुफिया जानकारी है।

फारस की खाड़ी और सामरिक रूप से बेहद अहम जलडमरूमध्य यानी Strait of Hormuz को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे को ईरान ने सिरे से खारिज कर दिया है जिसमें उन्होंने कहा था कि वाशिंगटन का इस समुद्री रास्ते पर पूरी तरह से नियंत्रण है। ईरानी विदेश मंत्री Seyed Abbas Araghchi ने इस बयान को फर्जी खुफिया जानकारी करार दिया और अमेरिका को चेतावनी दी कि इस संवेदनशील जलमार्ग पर कोई भी गलत कदम भारी पड़ सकता है।
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता तनाव
हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फारस की खाड़ी में एक मजबूत नौसैनिक नाकाबंदी का दावा किया था और कहा था कि अमेरिका के पास इस इलाके का पूरा कंट्रोल है। लेकिन ईरान के अधिकारियों ने इन दावों को गलत बताया है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि यह क्षेत्र पूरी तरह से ईरान के नियंत्रण और प्रबंधन में है। ईरान के बासिज अर्धसैनिक बल के प्रमुख Hossein Taeb ने भी इस बात की पुष्टि की है कि खाड़ी के इस हिस्से में ईरान की पकड़ मजबूत है।
अमेरिकी सेना की कार्रवाई और कमर्शियल जहाजों पर असर
दूसरी तरफ, अमेरिकी सेंट्रल कमांड की तरफ से मिली जानकारी के मुताबिक फारस की खाड़ी में सैन्य गतिविधियां तेज हो गई हैं। 12 अगस्त तक अमेरिकी सेना ने लगभग 59 कमर्शियल जहाजों का रास्ता बदला, तीन जहाजों को निष्क्रिय किया और दो जहाजों पर बोर्डिंग की कार्रवाई की। हालांकि अमेरिका का यह कहना है कि तटस्थ जहाजों के लिए यह समुद्री मार्ग अभी भी खुला हुआ है, लेकिन पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी का मानना है कि यह रास्ता अभी भी प्रभावी रूप से बंद है।
ईरान की शर्तें और आगे का रुख
ईरान के सुरक्षा प्रमुख Mohammad Bagher Zolghadr ने साफ तौर पर कहा है कि यह नाकाबंदी तब तक जारी रहेगी जब तक अमेरिका अपनी सेना को पीछे नहीं हटाता और सैन्य धमकियों को बंद नहीं करता। इसके अलावा, ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmail Baghaei ने यह भी मांग की है कि भविष्य में किसी भी समाधान से पहले अमेरिकी सैन्य मौजूदगी की वजह से पर्यावरण को हुए नुकसान की भरपाई और उस पर बात होनी जरूरी है। खाड़ी देशों में काम करने वाले प्रवासियों और भारत से आने-जाने वाले लोगों के लिए भी इस तनाव पर नजर रखना जरूरी है क्योंकि इससे क्षेत्रीय स्थिरता पर असर पड़ सकता है।