Strait of Hormuz: ईरान ने अमेरिका के दावों को नकारा, कहा- हमारी मर्जी से खुलेगा या बंद होगा रास्ता.

ईरान के अधिकारियों ने Strait of Hormuz पर अमेरिका के दावों को साफ तौर पर खारिज कर दिया है। ईरान का कहना है कि यह महत्वपूर्ण जलमार्ग पूरी तरह से उनके संप्रभु अधिकार के अधीन है और तेहरान के आदेश पर ही इसे खोला या बंद किया जाएगा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के हालिया बयानों को ईरान ने केवल राजनीतिक बयानबाजी करार दिया है। इस पूरे मामले ने खाड़ी देशों में तनाव को काफी बढ़ा दिया है, जिसका असर वहां रहने वाले आम लोगों और कामगारों पर भी पड़ रहा है।
समुद्री व्यापार पर असर और क्षेत्रीय तनाव
इस कूटनीतिक तनाव के कारण समुद्री व्यापार पर बहुत बुरा असर पड़ा है। जलमार्ग से होने वाला जहाजों का आना-जाना घटकर संघर्ष से पहले के औसत का मात्र 17% रह गया है। संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE द्वारा अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी से जुड़े दो जहाजों पर हमलों के आरोप के बाद मामला और गंभीर हो गया है। सऊदी अरब, कतर और मिस्र जैसे पड़ोसी देशों ने इन हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया है।
दूसरी तरफ, यूएस सेंट्रल कमांड का कहना है कि उनकी नौसेना ने 62 कमर्शियल जहाजों का रास्ता बदला है और तीन जहाजों को निष्क्रिय किया है। अमेरिकी रक्षा विभाग के अधिकारी पीट हेगसेथ का दावा है कि इस कार्रवाई को अनिश्चित काल तक जारी रखा जा सकता है। कूटनीतिक मोर्चे पर, कनाडा ने नेविगेशन में बाधा डालने के आरोप में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के सदस्यों सहित पांच वरिष्ठ ईरानी अधिकारियों पर नए प्रतिबंध लगा दिए हैं।
भारत और खाड़ी देशों के प्रवासियों पर प्रभाव
अमेरिकी नौसेना की बढ़ती मौजूदगी और यूएसएस जॉर्ज वाशिंगटन के आने की संभावना के बीच, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने स्पष्ट किया है कि इस समय वाशिंगटन के साथ कोई औपचारिक बातचीत नहीं चल रही है। इससे अंतरराष्ट्रीय समुदाय में क्षेत्रीय संघर्ष और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के अस्थिर होने को लेकर चिंता बनी हुई है। खाड़ी देशों में काम करने वाले भारतीय प्रवासियों और उनके परिवारों के लिए यह स्थिति चिंता का विषय है, क्योंकि ऊर्जा आपूर्ति और आर्थिक गतिविधियों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर नौकरियों और बाजार पर पड़ता है।